यहां पर आपको बताएंगे कि गांव और कस्बों को बड़े अस्पतालों की सौगात कैसे मिल सकती है।
जैसा कि आप जानते हैं कि आज भी गांव और कस्बों में नाम पात्र के छोटे-छोटे अस्पताल हैं लेकिन अब हो सकता है कि गांव वासियों के भी दिन फिरने वाले हैं। गांव, कस्बों और छोटे शहरों में भी अत्याधुनिक सुविधाओं से लेस नामी-गिरामी अस्पताल खुलें इसके लिए सरकार प्राइवेट प्लेयर्स को सब्सिडी देने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा सिंगल विंडो क्लीयरेंस और रियायती दरों पर लोन भी दिया जा सकता है।

मनी कंट्रोल की रिर्पोट के अनुसार आने वाले समय में अच्छे से इलाज की उम्मीद में छोटे शहरों के लोगों को बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब छोट शहरों में भी मैक्स, फोर्टिस और अपोलो जैसे अस्पताल खुल सकेंगे। इन्हें बनाने के लिए कुल लागत का 40 प्रतिशत सरकार देगी।
इसके अलावा अस्पताल के लिए जरुरी मंजूरियां जैसे की फायर सुरक्षा सर्टिफिकेट, इंवायरमेंट क्लियरेंस, Lift का लाइसेंस, हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेशन सिंगल विंडो सिस्टम के तहत मिलेगा। यदि इस प्रक्रिया में देरी हुई तो तय समय के बाद फाइल खुद मंजूर मान ली जाएगी।
फिलहाल ये सभी फायदे प्राइवेट अस्पतालों को तभी मिलेंगे जब अस्पताल टियर 2, टियर 3 और टियर 4 शहरों में खोले जाएंगे। इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को अस्पताल बनाने के लिए जमीन चिन्हित करने को भी कहा है।
दिल्ली के बड़े अस्पतालों के बाहर खुले में दिन रात गुजारने को मजबूर भीड़ दूसरे राज्यों से आती है क्योंकि इन्हें इनके राज्यों से बेहतर और सस्ता इलाज नहीं मिल पाता है। केंद्र सरकार की यह पहल कामयाब रही तो इन्हें लोगों को अब दिल्ली मुंबई और लखनउु का सफर तय नहीं करना पड़ेगा।


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