रिजर्व बैंक ने ग्राहकों को राहत देते हुए कहा है कि डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड अभी भी काम करेंगे।
भारतीय रिजर्व बैंक ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। फेस्टिव सीजन में 90 करोड़ से अधिक डेबिट और क्रेडिट कार्ड के बंद होने का खतरा फिलहाल टल गया है। फिलहाल विदेशी कार्ड पेमेंट गेटवे कंपनियों पर कुछ बंदिशें लगाई हैं। बता दें कि RBI कंपनियों को कुछ दिशा-निर्देश दे सकता है। रिर्पोट के अनुसार वित्तीय डाटा स्टोरेज पर आरबीआई रियायत नहीं देगा। तो वहीं केंद्रीय बैंक ने तारीख बढ़ाने पर भी अभी कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि, डाटा सिक्योरिटी पर बैंक का रुख अभी भी सख्त है क्योंकि आरबीआई सुरक्षा के हिसाब से ये कदम उठाना चाहता है।
घरेलू कंपनियां बैंक के समर्थन में
आरबीआई के इस कदम की पेटीएम, फोनपे जैसी घरेलू कंपनियों समर्थन किया है। पेटीएम की ओर से कहा गया है कि अहम डाटा की जानकारी किसी भी सूरत में देश से बाहर नहीं जानी चाहिए, प्रोसेसिंग के लिए भी नहीं। तो वहीं फोनपे की ओर कहा गया है कि हमने RBI को सूचित कर दिया है कि हमारा डाटा सिस्टम पूरी तरह से स्थानीय है। हमने समयसीमा के भीतर इस काम को पूरा किया है।
80 प्रतिशत कंपनियों ने RBI की मानी शर्त
रिजर्व बैंक के इस शर्त को अमेजन, अलीबाबा और व्हाट्सएप समेत करीब 80 प्रतिशत कंपनियों ने पेमेंट संबंधी आंकड़े देश में ही रखने की बैंक की शर्तों को पूरा कर लिया है। आज से आरबीआई केस दर केस के आधार पर चीजों को देखेगा। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि शर्तों का अनुपालन नहीं होने पर कोई कार्रवाई करेगा या जुर्माना लगाएगा। सभी कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा पेमेंट संबंधी डाटा को केवल भारत में ही स्टोर करना होगा।
गूगल ने और समय की मांग की
इसके अलावा सी बीच गूगल भी डाटा स्थानीयकरण की शर्त मानने को तैयार हो गया है, लेकिन इसे पूरा करने के लिए दिसंबर तक का समय मांगा है। इस बीच, कुछ लोगों का मानना है कि इस फैसले से कंपनियों के भारत में बिजनेस करने पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
भारत में इन कंपनियों के हैं सबसे ज्यादा कार्ड
देश में सबसे ज्यादा डेबिट और क्रेडिट कार्ड सबसे ज्यादा मास्टर कार्ड और वीजा के जारी होते हैं। इन कंपनियों का सर्वर देश के बाहर स्थित है। आरबीआई विदेश में स्थित सर्वर को देश में स्थापित करने के लिए कपंनियों को काफी समय से कह रहा है। जिस पर इन कंपनियों का कहना है कि वक्त तो कम है ही, उन्हें पॉलिसी की पूरी जानकारी भी नहीं है। डाटा स्थानीय स्तर पर लागू करने के दौरान व्यापारियों को ज्यादा सावधान रहना होगा और उपभोक्ताओं को एक नए सिरे से कागजात देने होंगे।
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