यहां पर आपको आधार डाटा लीक से जुड़े मामले के बारे में बताएंगे।
आधार डाटा लीक का मामला तो जैसे रुक ही नहीं रहा है। डिजिटल सुरक्षा कंपनी गेमाल्टो की एक रिर्पोट में दावा किया गया है कि वर्ष 2018 की पहली छमाही में आधार सेंधमारी के मामले में एक अरब रिकॉर्ड चोरी हुए। जिसमें कि नाम, पता या अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं शामिल हैं। इस बारे में भारत विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को भेजे ई-मेल का जवाब नहीं मिला।
अमेरिका में डाटा लीक के सबसे ज्यादा मामले
रिर्पोट के अनुसार भारत में आधार आंकड़ों से समझौते की वजह से सेंधमारी का आंकड़ा उुंचा रहा है। गेमाल्टो की रिर्पोट के अनुसार अमेरिका अब भी इस तरह के हमलों का सबसे बड़ा शिकार है। ग्लोबल स्तर पर सेंधमारी के कुल मामलों में 57 प्रतिशत का शिकार अमेरिका रहा है। कुल रिकॉर्ड चोरी में 72 प्रतिशत अमेरिका में चोरी हुए हैं। हालांकि, सेंधमारी के मामलों में इससे पिछली छमाही की तुलना में 17 प्रतिशत की कमी आयी है।
भारत में 37 प्रतिशत रिकॉर्ड चोरी के मामले
इसके अलावा सेंधमारी या रिकॉर्ड चोरी की बात की जाए तो ग्लोबल स्तर पर हुए ऐसे मामलों में 37 प्रतिशत का शिकार भारत बना है। ताजा आंकड़ों के अनुसार वैश्विक स्तर पर 945 सेंधमारी मामलों में 4.5 अरब डाटा चोरी हुए। इनमें से एक अरब डाटा चोरी के मामले सामने आए।
सोशल मीडिया से सबसे ज्यादा डाटा चोरी
तो वहीं रिर्पोट में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया मंच प्लेटफार्म पर दो अरब प्रयोगकर्ताओं के डाटा सेंधमारी हुई। यह वैश्कि स्तर पर इस तरह की सबसे बड़ी घटना है। इसके बाद आधार डाटा में सेंधमारी का स्थान आता है। रिर्पोट में कहा गया था कि एक गुमनाम सेवा किसी को भी 500 रुपए खर्च कर 1.2 अरब भारतीय नागरिकों की व्यक्तिगत सूचनाओं तक पहुंच उपलब्ध करा रही थी।
यूआईडीएआई ने डाटा सेंधमारी को किया इंकार
फिलहाल, यूआईडीएआई ने डाटा सेंधमारी की किसी भी घअना से इंकार किया था, लेकिन साथ ही उसने इस बारे में खबर करने वाली पत्रकार और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।


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