फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन ने ग्राहकों को क्रेडिट पर सामान देने के लिए आधार के इस्तेमाल का ऐलान किया है। कुछ वकीलों ने दोनों ईकॉमर्स कंपनियों के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ बताया है।
फ्लिपकार्ट और ऐमजॉन ने ग्राहकों को क्रेडिट पर सामान देने के लिए आधार के इस्तेमाल का ऐलान किया है। कुछ वकीलों ने दोनों ईकॉमर्स कंपनियों के इस कदम को सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ बताया है। कोर्ट ने प्राइवेट कंपनियों को ग्राहकों से आधार डीटेल्स मांगने से मना किया है। ऐमजॉन का द ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 10 से 15 अक्टूबर तक जबकि फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डे सेल 10 से 14 अक्टूबर तक चलनेवाली है।
हालांकि दोनों कंपनियों ने बिक्री बढ़ाने के लिए क्रेडिट और डेबिट कार्ड के बिना ही इंस्टैंट क्रेडिट ऑफर कर रही है। जिसके लिए अपना आधार आईडी नंबर देना होगा। इंस्टैंट लोन से उन ग्राहकों को टारगेट किया जायेगा जो ईकॉमर्स प्लैटफॉर्म पर सामान चुनकर अपने कार्ट में रख तो लेते हैं, लेकिन पैसे या लोन के परेशानी के कारण ऑर्डर नहीं कर पाते है।

उन तमाम ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए अमेजन और फ्लिपकार्ट ने अपने मोबाइल एप्प पर 60 हजार रुपये तक के क्रेडिट ऑफर कर रही हैं। बता दें कि वह भी ब्याज मुक्त है। एप्प पर अपना पैन और आधार नंबर डालकर ग्राहक पता कर सकते हैं कि उन्हें कितनी रकम का क्रेडिट दिया गया है।
दरअसल, कंपनियां ग्राहकों की पिछली खरीदारियों और पेमेंट हिस्ट्री के मुताबिक क्रेडिट के रूप में अलग-अलग रकम ऑफर कर रही हैं। हालांकि बता दें कि टाइम्स आफॅ इंडिया ने जिन वकीलों से बात की है, उन्होंने कहा कि ईकॉमर्स कंपनियों का यह ऑफर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सीधा-सीधा उल्लंघन है। वहीं पूर्व अतिरिक्त महान्यायवादी अडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी. विल्सन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि प्राइवेट कंपनियों द्वारा इस तरह की जानकारियां मांगने को किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं ठहाराया जा सकता है।
जबकि प्राइवेट लॉ फर्म के मालिक रमेश कुमार के मुताबिक, कंपनियां अपने प्लैटफॉर्म पर किसी भी तरह की स्कीम के लिए आधार डीटेल्स नहीं मांग सकती हैं। जब फ्लिपकार्ट के प्रवक्ता से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि कंपनी सभी कानूनों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करने के प्रति पूर्णतः समर्पित है। वहीं, ऐमजॉन इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी के लिए दुनियाभर में स्थानीय कानूनों का पालन करना शीर्ष प्राथमिकता रही है।


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