वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट और 100 प्रतिशत FDI के विरोध में शुक्रवार को व्यापारियों ने भारत बंद का ऐलान किया है।
वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट और 100 प्रतिशत FDI के विरोध में शुक्रवार को व्यापारियों ने भारत बंद का ऐलान किया है। आपको बता दें कि इस बंद में उत्तर प्रदेश के व्यापारी शामिल नहीं होंगे। ऐसा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले आश्वासन के बाद फैसला लिया गया। तो वहीं केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट फेडरेशन ऑफ यूपी ने प्रदेश भर की दवा दुकानों को बंद रखने का फैसला लिया है।
7 करोड़ से अधिक कारोबारी बंद में लेंगे हिस्सा
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने अपने बयान में कहा है कि देश के सभी व्यावसायिक बाजार बंद रहेंगे और कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं होगी। इस बंद में देश भर के सात करोड़ से अधिक छोटे कारोबारियों के हिस्सा लेने की संभावना है। व्यापारियों के संगठन ने यह दावा किया है कि दिल्ली के कारोबारियों द्वारा व्यापार बंद का आयोजन किया जाएगा। जिसके तहत सभी थोक और खुदरा बाजार बंद रहेंगे।
ऑनलाइन दवाई के विरोध में मेडिकल स्टोर रहेंगे बंद
साथ ही केंद्र सरकार द्वारा इंटरनेट के जरिए दवाओं की बिक्री यानी ई-फार्मेसी को मंजूरी दिए जाने के खिलाफ ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एड ड्रगिस्ट (AIOCD) ने भी 28 सितम्बर को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। आपको बता दें कि देशभर में दवाइयों के वितरण कारोबार से जुड़े AIOCD के लगभग 8 लाख सदस्य 28 सितम्बर को दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
50 करोड़ तक का होगा नुकसान
एक दिन की बंदी से प्रदेश में 50 करोड़ का नुकसान होगा। सीडीएफयूपी के अध्यक्ष गिरिराज रस्तोगी ने कहा कि सरकार के भेदभाव पूर्वक रवैये की वजह से यह बंदी की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के लिए सरकार कड़ा फैसला ले। इसकी बिक्री पर रोक लगाई जानी चाहिए। इससे कम में समझौता नहीं है।
छोटे व्यापारियों का कारोबार ठप्प होने का डर
कारोबारियों का कहना है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों को पिछले दरवाजे से प्रदेश देकर सरकार छोटे व्यापारियों को खत्म करना चाहती है। खुदरा क्षेत्र में 100 प्रतिशत FDI आने से व्यापारियों और दुकानदारों का करोबार ठप्प पड़ने का खतरा बढ़ गया है। वर्तमान नियम वॉलमार्ट को भारत में काम करने की इजाजत नहीं देते हैं।


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