कंपनियों को रजिस्‍ट्रेशन और लाइसेंस के लिए ऑनलाइन करना होगा आवेदन!

रजिस्‍ट्रेशन और लाइसेंस पाने के लिए कंपनियों को अब श्रम सुविधा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। श्रम मंत्रालय ने कुछ नियमों के तहत इस प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया है।

कंपनियों के लिए श्रम मंत्रालय एक नया नियम लेकर आया है। जी हां रजिस्‍ट्रेशन और लाइसेंस पाने के लिए कंपनियों को अब श्रम सुविधा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। श्रम मंत्रालय ने कुछ नियमों के तहत इस प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही फीस का भुगतान भी ऑनलाइन ही होगा।

लेबर मिनिस्‍ट्री के अनुसार डिजिटल इंडिया पहल पर सरकार द्वारा दिए जा रहे जोर को देखते हुए मंत्रालय ने श्रम सुविधा पोर्टल पर रजिस्‍ट्रेशन और लाइसेंस की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से लागू की है।

ऑनलाइन ही मिलेगा कंपनी को सर्टिफिकेट

ऑनलाइन ही मिलेगा कंपनी को सर्टिफिकेट

संशोधित 'भवन एवं अन्‍य निर्माण कामगार (रोजगार एवं कार्य की शर्तों का नियमन) केंद्रीय कानून नियम 2018' के अनुसार अब नियोक्‍ताओं को कंपनी के पंजीकरण का प्रमाण पत्र प्राप्‍त करने के लिए अनिवार्य रुप से श्रम सुविधा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा और पोर्टल के जरिए ही इसे नियोक्‍ताओं को जारी किया जाएगा। इसके अलावा कुछ मामलों में जमा किए जाने वाला पंजीकरण शुल्‍क एवं सुरक्षा राशि अब केवल ई-भुगतान के जरिए ही जमा की जा सकेगी।

मैट‍रनिटी लीव 26 सप्‍ताह किए जाने से महिलाएं का रोजगार हुआ प्रभावित

मैट‍रनिटी लीव 26 सप्‍ताह किए जाने से महिलाएं का रोजगार हुआ प्रभावित

तो वहीं फिक्‍की के एक कार्यक्रम के बाद श्रम मंद्धी संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि मातृत्‍व अवकाश को 12 सप्‍ताह से बढ़ाकर 26 सप्‍ताह किए जाने के चलते महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं। साथ ही यह भी कहा कि इस दिशा में जरुरी कदम उठाए जाएंगे। एक रिर्पोट में यह भी कहा गया था कि प्रगतिशील कानून से चालू वित्‍त वर्ष में करीब 18 लाख महिलाओं को रोजगार तलाशने में कठिनाई हो सकती है।

मातृत्‍व संशोधित कानून के नियम

मातृत्‍व संशोधित कानून के नियम

आपको बता दें कि सरकार ने मार्च 2018 में मातृत्‍व लाभ कानून 2017 अधिसूचित किया था। इसमें महिलाओं को बेहतर लाभ देने के लिए 55 साल से अधिक पुराने कुछ प्रावधानों में बदलाव किए गए और मातृत्‍व अवकाश 12 सप्‍ताह से बढ़ाकर 26 सप्‍ताह किया गया। इस नए कानून के तहत 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली हर कंपनी के लिए निर्धारित दूरी के भीतर पालनाघर सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य किया गया है। साथ ही कंपनी को महिला कर्मचारियों को एक दिन में चार बार पालनाघर जाने की अनुमति भी देनी होगी।

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