वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को बैंकों से कहा कि फ्रॉड और विलफुल डिफॉल्ट्स की स्थिति में सख्त लिए जाएं। इकोनॉमी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा लौटना जरूरी है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को बैंकों से कहा कि फ्रॉड और विलफुल डिफॉल्ट्स की स्थिति में सख्त लिए जाएं। इकोनॉमी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा लौटना जरूरी है। जिसमें उन्होंने बैंकों के सालाना प्रदर्शन की समीक्षा की।
इतना ही नहीं जेटली ने कहा कि सही लोगों को कर्ज सुनिश्चित करने के लिए बैंकों को उचित कदम उठाने चाहिए। साथ ही बैंकों को सुनिश्चित करना चाहिए कि फ्रॉड और विलफुल डिफॉल्ट करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाए।

इस बात की जानकारी वित्त मंत्रालय ने एक ट्विट के जरिए ये जानकारी दी। वित्तमंत्री के अलावा बैठक में 21 सरकारी बैंकों के सीईओ भी मौजूत थे। इनसे क्रेडिट ग्रोथ, रिकवरी, फाइनेंशियल इनक्लूजन और सुधारों पर बातचीत की गयी।
एनपीए के मुद्दे पर रिव्यू
बता दें कि बैठक में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, कैनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक समेत कई सरकारी बैंकों के प्रमुख मौजूद थे। हाल ही में सरकार ने बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक के विलय काएलान किया था। सरकारी बैंकों का एनपीए (फंसा हुआ कर्ज) लगातार बढ़ रहा है। इन बैंकों नें मौजूदा वित्तवर्ष की पहली तिमाही में 36,551 करोड़ रुपए की वसूली की। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 49 फीसदी की तेजी आई। वित्तवर्ष 2017-18 में बैंकों ने कुल 74,562 करोड़ रुपए वसूले थे।
बैंकों को हुआ 87 हजार का घाटा
वहीं सरकारी बैंकों को पिछले वित्तवर्ष में कुल 87,357 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। इसमें नीरव मोदी के घोटाले के कारण सबसे ज्यादा नुकसान पंजाब नेशनल बैंक को हुआ था। पीएनबी को 12,283 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। देश में 21 सरकारी बैंक हैं जिसमें सिर्फ इंडियन बैंक और विजया बैंक को पिछले वित्तवर्ष में मुनाफा हुआ था।


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