यहां पर आपको 60 कंपनियों के बारे में बताएंगे, जो कि दिवालिया होने वाली हैं।
कॉपोरेट डिफॉल्टर्स के खिलाफ बैंकों को अगले सप्ताह बैंकरप्सी प्रोसिडिंग की शुरुआती करनी होगी, क्योंकि 12 फरवरी को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित छह महीने की समयसीमा सोमवार को समाप्त हो रही है। तो वहीं रेजॉलूशन में असफल रही कंपनियों के खिलाफ एक्शन लिया जाना है।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क के अनुसार करीब 60 खातों पर 3.5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज होने का अनुमान है, जिन्हें पहले ही नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) घोषित किया जा चुका है। 180 दिनों की समय सीमा बेहद नजदीक है, लेकिन एसबीआई 11 डिफॉल्ट केसों के समाधान के लिए पूरा जोर लगा रही है। इन पर करीब 62 हजार रुपए का कर्ज है।
एसबीआई चेयरमैन के अनुसार 4 मामलों को नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) के पास भेजा गया है। शेष 7 में, प्रक्रिया लेंडर्स से अप्रूवल के विभिन्न चरणों में है और हम इसे अगले सप्ताह तक पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि यह पूरा नहीं होता है तो NCLT को रेफर करने का ही विकल्प बचेगा।
12 फरवरी को आरबीआई की ओर से जारी सर्कुलर का बैंकों पर दोहरा असर पड़ा। पहला असर मार्च 2018 में बैंकों के तिमाही नतीजे पर दिखा।
आरबीआई सर्कुलर में यह भी कहा गया है 2,000 करोड़ रुपए से अधिक NPA के मामले में बैंक छह महीने के भीतर रिजॉलूशन का लक्ष्य रखें। रेटिंग एजेंसी ICRA के एक विश्लेषण के अनुसार 3.8 लाख करोड़ रुपए वाले 70 बड़े खातों का रेजॉलूशन 1 सितंबर 2018 तक होना है।


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