यूजर के डाटा की सुरक्षा के लिए डिजिटल इकोनॉमी की ग्रोथ पर बनी सरकारी समिति का कहना है कि जाति-धर्म, पासवर्ड, लैंगिक प्राथमिकता, आधार और टैक्स संबंधी जानकारी ये सब संवेदनशील व्यक्तिगत आंकड़ें हैं।
यूजर के डाटा की सुरक्षा के लिए डिजिटल इकोनॉमी की ग्रोथ पर बनी सरकारी समिति का कहना है कि जाति-धर्म, पासवर्ड, लैंगिक प्राथमिकता, आधार और टैक्स संबंधी जानकारी ये सब संवेदनशील व्यक्तिगत आंकड़ें हैं। समिति का कहना है कि यूजर की स्पष्ट सहमति के बिना इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

जस्टिस बी एन श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने डाटा सुरक्षा कानून का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 15 करोड़ रुपए से लेकर उनके अंतराष्ट्रीय कारोबार के कुल टर्नओवर का 4 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाने का सुझाव दिया है।
कमेटी ने डाटा सुरक्षा कानून पर कहा कि यूजर को उसकी सहमति की जानकारी होनी चाहिए। सहमति साफ होनी चाहिए और सहमति को वापस लेने का भी यूजर के पास अधिकार होना चाहिए। आपको बता दें कि जस्टिस श्रीकृष्ण की यह रिर्पोट शुक्रवार को सूचना तकनीकि मंत्री रविशंकर प्रसाद को सौंप दी गई।
इस बारे में समिति का कहना है कि इंटरनेट के ग्राहकों को अपने डाटा तक पहुंचने का अधिकार होना चाहिए। कमेटी ने बिना जानकारी के डाटा में बदलाव किए जाने को लेकर भी चिंता जताई और ऐसा रोकने के लिए जरुरी सुझाव दिए हैं।
समिति ने कहा कि इंटरनेट ग्राहक और गूगल, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया साइट के इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को अपना डाटा किसी भी वक्त हासिल करने का अधिकार होना चाहिए।
साथ ही समिति ने कहा है कि हर उपभोक्ता की व्यक्तिगत जानकारी इकठ्ठा करने और थर्ड पार्टी एप के जरिए यूजर के डाटा को जमा करने के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों का जिक्र किया है।
बता दें कि कुछ दिन पहले ही फेसबुक और कैंब्रिज एनालिटिका के डाटा लीक मामले में कुछ इसी तरह की बातें सामने आयी थीं।


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