बिल्‍डरों से पैसा न‍िकालना अब होगा मुश्‍किल

अब म‍कान या फ्लैट की रकम चुकाने के बाद भी अगर आपको उसका कब्‍जा नहीं मिला है और आप बिल्‍डर से पूरी रकम वापस चाहते हैं तो यह खबर आपको परेशान कर सकती है।

अब म‍कान या फ्लैट की रकम चुकाने के बाद भी अगर आपको उसका कब्‍जा नहीं मिला है और आप बिल्‍डर से पूरी रकम वापस चाहते हैं तो यह खबर आपको परेशान कर सकती है। राष्‍ट्रीय कंपनी विधि न्‍यायाधिकरण के अध्‍यक्ष जस्‍टिस एमएम कुमार ने कहा है कि इनसॉल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड में संशोधन के बाद घर खरीदारों से धोखा करने वाली रीयल एस्‍टेट कंपनी या बिल्‍डर से अपना पैसा निकालना आसान नहीं होगा। सरकार ने 16 महीने पुराने आईबीसी में संशोधन के लिए अध्‍यादेश लाने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है। वहीं उन्‍होंने कहा कि आईबीसी के तहत वित्तीय ऋणदाता बनने के बावजूद फ्लैट खरीदारों के लिए ड‍िफाल्‍ट करने वाले ब‍िल्‍डर से धन की वसूली आसान नहीं होगी।

If you do not get possession even after repaid the house amount and you want full amount from the builder then this news can disturb you

बचा सकता सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस कुमार ने यहां उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआई द्वरा आयोजित संगोष्ठी दबाव वाली परिसंत्तियों का पुनर्गठन-मौजूदा परिदृश्य में कहा कि जब तक घर खरीदारों की मदद के लिए उच्चतम न्यायालय आगे नहीं आता तब तक आईबीसी के तहत धन वापस लेने में उनके लिए काफी जोखिम है। उन्होंने कहा कि आईबीसी (संशोधन के बाद) के तहत फ्लैट खरीदार वित्तीय ऋणदाता बन गए हैं, लेकिन वे इससे खुश नहीं हैं। जस्टिस कुमार ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करता है तो इससे ही फ्लैट खरीदारों की मदद हो सकेगी। वहीं उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर कानूनी तौर पर कहा जाए तो काफी जोखिम हैं।

क्‍यों हो रहा आईबीसी में संशोधन
हम आपको बता दे कि वित्‍त मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को संसद में इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड में दूसरा संशोधन विधेयक पेश किया है। पहले जो आईबीसी था उसमें फ्लैट खरीदने वालों को बिल्डर की कंपनी में हिस्सेदार नहीं माना गया था। ऐसे में बिल्डर के दिवालिया होने पर उसकी प्रॉपर्टी के नीलाम होने पर बैंकों और अन्य कर्जदारों को ही हकदार माना गया था। पिछले दिनों जेपी ग्रुप और आम्रपाली बिल्डर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने पर यह समस्या सामने आई थी। जबकि कुछ खरीदारों ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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