आरबीआई ने लिबरलाइज्ड प्रेषण योजना के तहत विदेशों में धनराशि भेजने के नियमों को कड़ा कर दिया है और इस योजना के तहत हर किसी के लिए पैन अनिवार्य बना दिया है।
अब पैन कार्ड ना होने पर आप अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा विदेशों में नहीं भेज पाएंगे, इसके साथ ही किसी भी तरह की संपत्ति या शेयर भी नहीं खरीद सकेंगे, और एक तय सीमा तक पैसा भेज पाएंगे उससे ज्यादा नहीं। साफ़ है कि सरकार ने इस बार यह सोच लिया है कि जो भी पैसा बाहर विदेशों में जाए वह टैक्स पेड हो, और वे भेजी गयी रकम के ऊपर निगरानी रख सके।
इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिर्पोट के अनुसार RBI ने लिबरलाइज्ड प्रेषण योजना के तहत विदेशों में धनराशि भेजने के नियमों को कड़ा कर दिया है और इस योजना के तहत हर किसी के लिए पैन अनिवार्य बना दिया है। यह घोषणा 5 जून 2018 को की गई है।
LRS नियमों को कर दिया गया है कड़ा
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लिबरलाइज्ड रेमिटन्स स्कीम (LRS) के तहत विदेशों में धन भेजने जाने के नियमों को कड़ा कर दिया है। जिसमें अब किसी भी काम के लिए भेजे गए धन के लिए पैन कार्ड जरुरी होगा। इससे पहले करेंट अकाउंट में $25,000 तक का ट्रैन्जेक्शन बिना पैन कार्ड के हो जाता था।
क्या है LRS
एलआरएस योजना का इस्तेमाल भारतीय ज्यादा करते हैं खास तौर पर जिनके बच्चे बाहर पढ़ाई कर रहें हैं और उनकी फीस, बाहर रहने का खर्च देने के लिए और विदेशी शेयरों और संपत्ति में निवेश करने के लिए। एलआरएस 2004 में उन भारतीय निवासियों के लिए खोला गया था जिनके बच्चे बाहर विदेशों में रह रहें हैं। वे अपने बच्चों के लिए पैसे और रहने का खर्च इसी योजना के तहत भेज सकते हैं।
एलआरएस का फायदा
एलआरएस बाहर रह रहे भारतियों को विदेशी स्टॉक कंपनीज जैसे Google, और Apple, के शेयर्स या विदेशों में संपत्ति खरीदने की अनुमति देता है। एलआरएस योजना के तहत आप दुनिया में कहीं भी निवेश कर सकते हैं साथ ही कहीं भी पैसा भेज सकते हैं।
उद्योगपतियों और बॉलीवुड हस्तियों निवेश पर किया गया है विचार
इस साल जनवरी में बैंक ने नोटिस किया कि कई सारे भारतीय उद्योगपति, बॉलीवुड की हस्तियां और हीरे के व्यापारियों ने विदेशों में निर्दिष्ट सीमा के बाहर जा कर स्टॉक और प्रॉपर्टीज में निवेश किया है, जिसके बाद सेंट्रल बैंक ने हर योजना के तहत पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया है।
अब तक इतनी बढ़ी है सीमा
इस योजना के नियमों के तहत अब व्यक्ति विदेशों में सिर्फ स्टॉक और संपत्तियों को ही खरीद सकता है, ना की किसी स्पेक्यूलेटिव बेट (वित्तीय रुप से सुरक्षित न होना) जैसे डेरिवेटिव पर लगा पायेगा। सालाना एलआरएस सीमा (प्रति व्यक्ति) 2015 में 1,25,000 डॉलर से 2,50,000 डॉलर तक बढ़ा दी गई है।
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