राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिवालिया कानून (इनसॉल्वेंसी एण्ड बैंकरप्सी कोड) 2018 से संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अगर कोई रियल एस्टेट कंपनी दिवालिया हो जाती है तो उसकी संपत्ति की नीलामी का हिस्सा घर खरीदारों को भी मिलेगा। इसका मतलब यह हुआ कि अब घर खरीदने वाला शख्स सिर्फ देनदार नहीं होगा। उनकी हैसियत कंपनी से लेनदार की भी होगी।

कॉर्पोरेट अफेयर्स सेक्रेटरी इंजेटी श्रीनिवास ने कहा है कि 'एक घर खरीदार ने भी अगर NCLT में शिकायत कर दी तो कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में जा सकती है।
आईबीसी कानून के तहत अगर बिल्डर की संपत्ति नीलाम होती है तो ग्राहकों को बैंकों के साथ ही रकम का हिस्सा मिलेगा। अब घर खरीदार भी बैंक की तरह फाइनेंशियल क्रेडिटर होंगे।
इनसॉल्वेंसी एण्ड बैंकरप्सी कोड संशोधन अध्यादेश 2018 को मंजूरी से घर खरीदार को भी क्रेडिटर्स की कमेटी में प्रतिनिधित्व मिलेगा। ये कमेटी ही मामला सुलझाने के प्रस्ताव पर काम करेगी।
घर खरीदने वाले आईबीसी के सेक्शन 7 के तहत कार्रवाई कर सकेंगे। सेक्शन 7 में फाइनेंशियल क्रेडिटर दिवालिया प्रक्रिया के तहत मामला सुलझाने की अपील कर सकते हैं।


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