डीजल-पेट्रोल की कीमतें फिलहाल के लिए नहीं बढ़ेंगी। इस बात की तरफ खुद देश की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी इंडियन ऑयल ने इशारा किया है। इंडियन ऑयल ने कहा कि वह नहीं चाहती है कि लोगों पर जल्दी-जल्दी बढ़ रही कीमतों का प्रभाव पड़े। इंडियन ऑयल के चेयरमैन संजीव सिंह ने कहा कि कंपनी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को अस्थायी तौर पर स्थिर रखने का फैसला किया है ताकि ईंधन के मूल्य में तीव्र वृद्धि नहीं हो और ग्राहकों में घबराहट न फैले।
कर्नाटक चुनावों के बाद बढ़ सकते हैं दाम!
सरकारी तेल कंपनियों ने कर्नाटक चुनाव से पहले पेट्रोल और डीजल के दामों की दैनिक समीक्षा का फैसला रोके जाने के बीच आईओसी ने यह बात कही है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां 24 अप्रैल से पेट्रोल और डीजलन के दाम में बदलाव नहीं कर रही हैं जबकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में मानक मूल्यों में करीब तीन डालर प्रति बैरल की तेजी आयी है। सिंह ने हालांकि संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में वृद्धि जारी रहती है , कीमत बढ़ेगी। आपको बता दें कि 12 मई को कर्नाटक में चुनावों के लिए मतदान होगा और ऐसी संभावना है कि उसके बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।
उच्चतम स्तर पर पेट्रोल-डीजल के दाम
पेट्रोल के 55 महीने के उच्च स्तर 74.63 रुपये प्रति लीटर पर पहुंचने और डीजल के रिकार्ड 65.93 रुपये लीटर पर आने के साथ वित्त मंत्रालय ने आम लोगों को राहत देने के लिये उत्पाद शुल्क में कटौती से इनकार किया था। उसके बाद पेट्रोलियम कंपनियों ने ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ायी हैं।
अंतरराष्ट्रीय में बढ़ रही है कीमतें
डीजल की अंतरराष्ट्रीय मानक दर इस दौरान 84.68 डालर प्रति बैरल से बढ़कर 87.14 डालर पहुंच गयी। साथ ही रुपया भी डालर के मुकाबले कमजोर होकर 65.41 से बढ़कर 66.62 पर पहुंच गया। इससे आयात महंगा हुआ है।
पेट्रोलियम मंत्री ने खारिज की रिपोर्ट्स
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने पिछले महीने उन रिपोर्ट को खारिज किया जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को लागत के मुताबिक ईंधन के दाम नहीं बढ़ाने और कम-से-कम एक रुपये प्रति लीटर का बोझ उठाने की बात कही गयी थी।


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