सुलभ स्वस्थ्य उपलब्ध करने की दिशा में स्वास्थ्य मंत्रालय ने ठोस क़दम उठाए है । राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधाओं की सभी इकाइयों जैसे ज़िला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य एवं शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के लिए मानक निर्धारित किये गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने दूसरे राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन के उद्घाटन दौरान ये बातें कहीं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, जो राज्य अभी तक मानकों को पूरा नहीं कर पाएं हैं उनको विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि, देश के 18 राज्यों के लोग यहां आए हुए हैं और मैं उम्मीद करता हूँ कि अगली बार अन्य राज्य जो छूट गये हैं वे अपनी गुणवत्ता में उपयुक्त श्रेष्ठता लाकर इस सम्मान को प्राप्त करने में सक्षम होंगे।
आपको बता दें कि, 'आयुष्मान भारत' ऐतिहासिक लोक कल्याणकारी योजना है इससे 60 करोड़ लोग प्रत्येक वर्ष रू. 05 लाख तक की चिकित्सा लाभ प्रति परिवार प्रतिवर्ष नि:शुल्क ले पायेंगे। आयुष्मान भारत के लिए इस वर्ष के बजट में रू 2000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
वेलनेस सेंटर योजना पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, "हमारा उद्देश्य देश भर में डेढ़ लाख (1.5 लाख) वेलनेस सेंटर के निर्माण करने का लक्ष्य है जिसे अगले पांच वर्षों में पूरा किया जाएगा। इसके लिए 1200 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है । उन्होंने बल देकर कहा कि जन हितकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सरकार पैसे की कमी नहीं होने देंगी।
सरकार ने स्वास्थ्य सेस लगाकर स्वास्थ्य सेवाओं को गरीब और कमजोर वर्ग को देने का संकल्प लिया है और राज्यों को भरपूर राशि वित्तीय व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी ताकि कोई ग़रीब पैसे की कमी कि वजह से स्वास्थ्य लाभ लेने से वंचित न रह जाए। उन्होंने सर्वजन हिताय सर्व जन सुखाय की बात कही और ' सर्वे भावन्तु सुखिन:, सर्वे संतुनिरामया ' का उल्लेख करते हुए भारत सरकार की स्वस्थ्य संबंधी प्रतिबद्धता को दोहराया।


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