प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। रिर्पोट के अनुसार पुर्नभुगतान यानि कि रीइंबर्समेंट का बड़ा हिस्सा टैक्स के दायरे में नहीं आएगा।
प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। रिर्पोट के अनुसार पुर्नभुगतान यानि कि रीइंबर्समेंट का बड़ा हिस्सा टैक्स के दायरे में नहीं आएगा। इसमें घर का किराया, टेलीफोन बिल, हेल्थ इंश्योरेंस, हेल्थ चेकअप, जिम आदि चीजें शामिल हैं। यह जानकारी वित्त मंत्रालय के द्वारा दी गई है।

बताया जा रहा है कि अगर रीइंबर्समेंट का बड़ा हिस्सा टैक्स के दायरे में लाया जाता है तो प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे लोगों की जेब पर बड़ा असर पड़ सकता था। आपको बता दें कि हाल ही में अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग (AAR) ने फैसला किया था कि कर्मचारियों के कैंटीन चार्जेस भी जीएसटी के दायरे में हैं।
इससे पहले भी टैक्स बचाने के लिए यह प्रयोग किया जा रहा था, जिसके बाद ये फैसला हुआ था। अगर रीइंबर्समेंट को जीएसटी दायरे में लाया जाता तो इससे लोगों के सैलरी पैकेज पर भी असर पड़ सकता था।
कुछ समय पहले केरल की एक फुटवियर कंपनी के मामले में अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग ने फैसला दिया था कि कर्मचारियों के फूड बिल जीएसटी के तहत टैक्स के दायरे में आते हैं। बात दें जीएसटी से जुड़े सारे फैसले जीएसटी काउंसिल करती है।
अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग का फैसला जीएसटी काउंसलि के लिए बाध्यकारी नहीं है। अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग भी वित्त मंत्रालय के ही अंदर आता है जिसका अधिकतर काम इनकम टैक्स विभाग से संबंधित होता है, ऐसा माना जा रहा था कि अगर रीइंबर्समेंट को जीएसटी के दायरे में लाया जाता तो प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता।


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