यहां पर जानिए एटीएम में कैश की कमी का कारण। साथ ही जानिए कि सरकार का इस पर क्या कहना है।
लगभग हर राज्य के एटीएम में कैश की किल्लत इस समय देखने को मिल रही है। पिछले कुछ सप्ताह से यह समस्या ज्यादा बढ़ गई है। पहले आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और मध्यप्रदेश में इस तरह की दिक्कत आ रही थी अब अन्य राज्यों में भी कैश की कमी सामने आ रही है। ATM में पैसों की कमी को लेकर सरकार अब जाकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। सरकार की ओर से केंद्र और राज्य वित्त मंत्री ने कुछ राज्यों में कैश की कमी की बात को स्वीकार किया है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक टिट्वीट के माध्यम से यह बताया है कि सरकार ने देश में करेंसी के हालात की समीक्षा की है। वित्तमंत्री ने कहा कि देश में जरुरत से ज्यादा नोट सर्कुलेशन में हैं और बैंकों में भी पर्याप्त नोट उपलब्ध हैं।
तीन दिनों में खत्म हो जाएगी कैश की किल्लत
तो वहीं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रसाद शुक्ल ने कहा है कि कुछ राज्यों में नोटों की पैदा हुई किल्लत तीन दिनों में खत्म हो जाएगी। जिन राज्यों में कैश की दिक्कत है वहां दूसरे राज्यों के मुकाबले कम नोट पहुंचे हैं। उन्होने ने कहा कि सरकार जरुरत के अनुसार राज्यों के बीच नोटों का उचित वितरण करने की दिशा में कदम उठा रही है।
इस तरह से बचें कैश की कमी से
फिलहाल, कैश की किल्लत से बचने के लिए आपको सचेत रहना होगा। जरुरी ट्रांजेक्शन के लिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल करें, ऐसे में जरुरी काम के लिए आपके पास कैश बचा रहेगा। आजकल लगभग हर शॉप में ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा होती है तो आप भी सुविधा का उपयोग करें।
नोटों की जमाखोरी का है संदेह
ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2000 के नोटों की जमाखोरी हो रही है। सिस्टम में सामान्य लेनदेन के लिए रिजर्व बैंक और सरकार के प्रिंटिंग प्रेस से छपकर निकली नोटें पर्याप्त हैं, लेकिन जमाखोरी की वजह से ये नोट आम आदमी तक नहीं पहुंच रहे हैं। आपको बता दें कि नोटबंदी के बाद 5 लाख करोड़ रुपए के 2000 के नोट छापे गए थे।
क्या कहते हैं आंकड़े
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 6 अप्रैल तक 18.17 लाख करोड़ रुपए सर्कुलेशन में थे। नोटबंदी के समय भी करीब इतनी ही करेंसी प्रणाली में थी। नकदी की किल्लत इसलिए भी अटपटी दिखती है, क्योंकि डिजिटलीकरण के बाद कैश की जरुरत में काफी कमी आई है।


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