हो सकता है कि आपके कॉलेज की कैंटीन या मेस में मिलने वाला खाना अब महंगा हो जाए। वित्तमंत्रालय ने अब ये स्पष्ट कर दिया है कि देश के सभी शिक्षण संस्थानों की कैंटीन या मेस में मिलने वाले खाने-पीने की चीजों पर जीएसटी अनिवार्य रुप से लिया जाएगा।

हालांकि इसमें विद्यार्थियों को एक बात का ध्यान रखना होगा कि जीएसटी लागू होने के बाद कैंटीन या मेस की तरफ से उनसे ज्यादा पैसे ना लिए जाएं। इस बात का ध्यान रखें कि जो भी चीज पैक्ड अवस्था में है उस पर लिखे एमआरपी में जीएसटी पहले से ही जुड़ा होता है इसलिए कैंटीन या मेस जीएसटी के नाम पर उनसे अतिरिक्त पैसे नहीं ले सकते हैं।
वहीं मंत्रालय ने ये भी स्पष्ट किया है कि जो 5 प्रतिशत जीएसटी ली जाएगी उस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा मंत्रालय ने ये भी कहा कि जो भी स्कूल खुद ही बच्चों को भोजन उपलब्ध कराएगा उसे जीएसटी से छूट मिलेगी। यदि उच्च माध्यमिक स्तर तक के स्कूल विद्यार्थियों को सीधे खाद्य पदार्थों की आपूर्ति करते हैं, तो उन पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा।
इससे पहले वित्तमंत्रालय ने रेलवे में खाने-पीने की चीजों पर भी अपना स्पष्टीकरण जारी किया था। जिसके मुताबिक अब ट्रेन में और रेलवे प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले खाने पर 5 प्रतिशत की जीएसटी की दरें चुकाना अनिवार्य होगा। रेलवे प्लेटफॉर्म पर IRCTC कैंटीन (भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड), लाइसेंस प्राप्त वेंडर्स द्वारा बेचे जाने वाले खाने-पीने की चीजों पर 5 प्रतिशत तक जीएसटी चार्ज होगा। जीएसटी परिषद ने स्पष्टी करण में कहा है कि इस जीएसटी पर इनपुट क्रेडिट टैक्स नहीं दिया जाएगा।


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