भारतीय रेल की दशा सुधारने के लिए केंद्र की मोदी सरकार तेजी से काम कर रही है। पहले देश भर में मालगाड़ी के लिए अलग ट्रैक बिछाने, फिर दिल्ली-आगरा रुट पर सेमी हाईस्पीड ट्रेन चलाने, अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन की परियोजना और अब स्वदेशी हाई पॉवर हाई स्पीड इंजन का निर्माण करके सरकार ने ये जता दिया है कि वह रेल की दशा सुधारने के लिए गंभीर है।
फ्रांस की मदद से शुरु हुआ निर्माण
बिहार के मधेपुरा में फ्रांस की मदद से शुरु की गई हाई स्पीड लोकोमोटिव फैक्ट्री से देश को पहला 12 हजार हॉर्स पॉवर का इंजन मिला है। इस इंजन के निर्माण से भारत दुनिया के उन चुंनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है जो 12 हजार हॉर्स पॉवर के इंजन का निर्माण करते हैं। भारत अब रुस, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और चीन जैसे देशों के क्लब में शामिल हो गया है।
130 किमी की रफ्तार!
मधेपुरा के लोकोमोटिव फैक्ट्री में 12 हजार HP के इस दमदार इंजन को फ्रांस की मदद से तैयार किया गया है। इस इंजन को बनाने का मुख्य लक्ष्य है यात्रा के घंटों में कमी लाना। अभी भारतीय रेल औसतन 70 से 80 किलोमीटर की स्पीड पर यात्रा करती हैं, वहीं इस इंजन के आ जाने से गति की क्षमता में काफी इजाफा हो जाएगा। माना जा रहा है कि ये इंजन अपनी पूरी क्षमता के साथ 130 किलोमीटर प्रतिघंटे तक की रफ्तार हासिल कर सकता है।
20 हजार करोड़ रुपए की परियोजना
हाईस्पीड लोकोमोटिव का पूरा प्रोजोक्ट 20 हजार करोड़ रुपए का है। इस लागत से अगले 11 वर्षों में 800 हाईस्पीड लोकोमोटिव बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना की कुल लागत में से 1300 करोड़ रुपए मधेपुरा में फैक्ट्री स्थापित करने में लगाए गए हैं। इसके अलावा दो लोको मेंटिनेंस डिपो सहारन पुर और नागपुर में स्थापित किए गए हैं। एक हाइस्पीड इंजन की औसत लागत 25 करोड़ रुपए आ रही है।
बदल रही भारतीय रेल की सूरत
ट्रेन की गति बढ़ाने के लिए और मालगाड़ी के लिए अलग से ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। सरकारी आकंडो के मुताबिक प्रतिदिन 1200 मीटर ट्रैक का निर्माण हो रहा है। हाईस्पीड इंजन के लिए आधुनिक ट्रैक बिछाए जा रहे हैं। इस तरह से अपनी खस्ताहाल स्थिति से बाहर निकलकर अब बदलाव की तरफ बढ़ रही है।


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