बिनानी सीमेंट्स के लिए पहले डालमिया की तरफ से 6,700 करोड़ रुपए की बोली लगी थी, जिसके बाद बिनानी सीमेंट्स को डालमिया को बेचने की स्वीकृति मिल गई थी।
देश की सबसे बड़ी कंपनी बिनानी सीमेंट्स को दीवालिया घोषित हो चुकी है। वहीं अब कंपनी अपने खिलाप दीवालिया होने की प्रक्रिया को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए तैयार है। खबरों के मुताबिक बिनानी सीमेंट्स सोमवार या उसके बाद कभी भी कोर्ट जाने की प्रक्रिया अपना सकती है।

वहीं कंपनी को लोन देने वाले देनदारों ने कहा है कि अगर बिनानी सीमेंट्स कोर्ट के बाहर मामला सुलझाना चाहती है तो उसे पहले सभी जरूरी मंजूरी लेनी होगी। खबरों के मुताबिक कंपनी ने इस बारे में एक विचार बनाया था और बैंकर्स कंपनी के ताजा प्रस्ताव से खुश हैं।
बिनानी सीमेंट्स के लिए पहले डालमिया की तरफ से 6,700 करोड़ रुपए की बोली लगी थी, जिसके बाद बिनानी सीमेंट्स को डालमिया को बेचने की स्वीकृति मिल गई थी। इसके बाद आदित्य बिरला ग्रुप की कंपनी अल्ट्राटेक ने बिनानी सीमेंट्स में 98.47 प्रतिशत हिस्सेदारी को खरीदने के लिए 7,266 करोड़ रुपए का एग्रीमेंट बिनानी सीमेंट्स के साथ किया।
अल्ट्राटेक की प्रक्रिया पर डालमिया सीमेंट्स ने एतराज जताया है। डालमिया सीमेंट्स के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि कि इस तरह का कदम अनुबंध का उल्लंघन है। पेशकश की प्रकिया समाप्त हो गयी है और हम करीब 630 करोड़ की बैंक गारंटी दे चुके हैं, यह एक पारदर्शी प्रक्रिया थी। आपको बता दें कि, बिनानी को कर्ज देने वाले बैंकों ने आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी की बोली का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने इस मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ा है।
समाचार पोर्टल नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक, माना जा रहा है कि डालमिया भारत-बेन पिरामल ग्रुप सुप्रीम कोर्ट में अल्ट्राटेक-बिनानी सीमेंट डील को चुनौती दे सकता है। वह यह तर्क देगा कि बैंकों का इस डील का समर्थन करना कानूनी तौर पर गलत है क्योंकि दिवालिया कानून के तहत इसे खरीदने का अधिकारी उसने हासिल किया था।
बैंकों ने पहले डालमिया ग्रुप की बोली को मंजूरी दी थी। तब अल्ट्राटेक सीमेंट ने अदालत में याचिका दायर करके बैंकों से इस पर पुनर्विचार करने को कहा था। हालांकि, उसकी इस अपील के बावजूद 99.5 पर्सेंट बैंकों ने डालमिया भारत के हक में फैसला सुनाया था।


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