पतंजलि आयुर्वेद कंपनी के मालिक बाबा रामदेव अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन आईपीएल क्रिकेट मैच में नहीं देंगे। बाबा रामदेव का मानना है कि क्रिकेट खासतौर पर IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) विदेशी खेल है। पतंजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण के अनुसार आईपीएल जैसे खेल उपभोक्तावाद को बढ़ावा देते हैं और बहुराष्ट्रीय कंपनियां इन्हें स्पॉन्सर करती हैं। पतंजलि कबड्डी और कुश्ती जैसे देसी खेलों से जुड़े आयोजनों में अपने प्रोडक्ट्स का प्रचार करेगी और उन्हें इस तरह से बढ़ावा देगी।
देश का रोमांचक खेल है आईपीएल
आपको बता दें कि आईपीएल क्रिकेट का सबसे आकर्षक और अमीर अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंट है। 2018 का टी-20 मैच 15 दिनों मे शुरु होने जा रहा है। तो वहीं पतंजलि देश की उन FMCG कंपनियों में से है, जो विज्ञापन पर काफी पैसा खर्च करती है। विज्ञापन पर इसका सालाना बजट 570-600 करोड़ रुपए है। पतंजलि प्रिंट मीडिया, डिजिटल और सोशल मीडिया दोनों पर काफी एड दे रही है, लेकिन वह IPL में एड देने से मना कर दी है।
कबड्डी, रेसलिंग को कर चुकी है स्पॉन्सर
बता दें कि पिछले साल पतंजलि ने प्रो-रेसलिंग को स्पॉन्सर किया था। यह कंपनी दो साल पहले कबड्डी वर्ल्ड कप को भी को-स्पॉन्सर की थी। बालकृष्ण के अनुसार हम भारतीय खेलों में निवेश जारी रखेंगे। ऐसे खेल जो देश की संस्कृति का प्रचार करते हों उन खेलों के लिए हम हमेशा विज्ञापन देंगे।
क्रिकेट को विदेशी खेल कहना है गलत
पतंजलि आयुर्वेद के प्रोडक्ट अमेजन के साथ-साथ अब पतंजलि की खुद की ऑनलाइन वेबसाइट पर भी मिलते हैं। आईपीएल को लेकर पतंजलि के इस बड़े फैसले पर देश के बड़े कम्युनिकेशन ग्रुप मैडिसन वर्ल्ड के प्रेसिडेंट के अनुसार क्रिकेट को विदेशी खेल कहना गलत होगा, और न ही आप भारतीय क्रिकेट बोर्ड को विदेशी बता सकते हैं।
कमाई के मामले में HUL से आगे निकलने का लक्ष्य
रामदेव की पतंजलि ने अगले साल तक देश की सबसे बड़ी कंज्यूमर गुड्स कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर से आगे निकलने का लक्ष्य तय किया है। पतंजलि अब लगभग डेली यूज के हर प्रोडक्ट बेचती है। वित्त वर्ष 2017 में कंपनी की सेल्स 10,561 करोड़ रुपए थी, जो हिंदुस्तान लीवर की एक तिहाई थी। वित्त वर्ष 2012 में पतंजलि की आमदनी 453 करोड़ रुपए थी, जो 2017 तक 20 गुना की बढ़ोत्तरी के साथ 10,561 करोड़ रुपए हो गई थी।


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