पंजाब नेशनल बैंक में हुए करोड़ों के घोटाले के चलते बैंकों के द्वारा अहम कदम उठाए जा रहे हैं। पीएनबी स्कैम को देखते हुए बैंकिंग सिस्टम में गड़बड़ी को ठीक करने के लिए सभी सरकारी बैंकों में स्विफ्ट और कोर बैंकिंग सिस्टम को जोड़ा जाएगा। सरकारी बैंकों के वर्कशॉप में इस पर सहमति बन गई है। इस योजना को जल्द ही सभी सरकारी बैंकों में लागू किया जाएगा। 30 अप्रैल 2018 तक स्विफ्ट और सीबीएस को जोड़ने का काम पूरा होगा।
Bill to increase maternity leave period and gratuity limit tabled in Lok Sabha 7th pay commision in hindi,private sector epmpoyee in hindi, payment of gratuity amendment bill 2017, maternity benefit bill 2017, labour reforms in hindi, सातवां वेतन आयोग, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी, ग्रैच्युटी बिल, मैटरनिटी बिल, ग्रेच्युटी लिमिट 20 लाख रुपए करने का बिल लोकसभा में पेश प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए ग्रैच्युटी लिमिट बढ़ाने और अधिक मैटरनिटी लीव देने के लिए सरकार ने लोकसभा में बिल पेश किया है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिर्पोट के अनुसार प्राइवेट सेक्टर में ग्रैच्युटी लिमिट सरकारी कर्मचारियों की तरह बढ़ाकर 20 लाख रुपए होने की उम्मीद है। आपको बता दें कि श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने सोमवार को पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी अमेंडमेंट बिल, 2017 सदन में पेश किया है। मैटरनिटी लीव बढ़ाने का भी प्रस्ताव पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी एक्ट 1972, फैक्ट्रियों, माइंस, ऑइलफील्ड, प्लांटेशन, पोर्ट, रेलवे कंपनियों, दुकानों या अन्य प्रतिष्ठानों में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए लागू किया गया था। यह 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान में कम से कम पांच वर्षों की नौकरी पूरी करने वाले कर्मचारियों पर लागू है। इसके अलावा मैटरनिटी बेनिफिट ऐक्ट 2017 के जरिए मैटरिनिटी लीव को 12 सप्ताह से बढ़ाकर अधिकतम 26 सप्ताह किया जाएगा। 10 लाख थी 2010 में ग्रैच्युटी की रकम नौकरी के प्रत्येक वर्ष के लिए 15 दिन के वेतन के आधार पर तय की जाती है। इसकी अधिकतम सीमा अभी 10 लाख रुपए है जो 2010 में तय की गई थी। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद ग्रैच्युटी की सीमा 10 लाख रुपए से बढ़कर 20 लाख रुपए की गई है। प्राइवेट सेक्टर के लिए भी जरुरी सरकार ने कहा है कि इन्फ्लेशन और वेतन में बढ़ोत्तरी के मद्देनजर सरकारी कर्मचारियों के साथ ही प्राइवेट सेक्टर से जुड़े कर्मचारियों के लिए ग्रैच्युटी की सीमा बढ़ाने की जरुरत है। इसके लिए एक्ट में संशोधन करने के बजाय केंद्र सरकार को अधिकार देने का प्रपोजल भी दिया गया है। इससे वेतन और इन्फ्लेशन में बढ़ोत्तरी और भविष्य के वेतन आयोगों को ध्यान में रखकर ग्रैच्युटी की लिमिट बढ़ाई जा सकेगी। रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा देने का लक्ष्य केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेमेंट ऑफ ग्रच्युटी बिल को संसद में पेश करने के लिए 12 सितंबर को हरी झंडी दी थी। इससे प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए भी ग्रैच्युटी लिमिट बढ़ाकर 20 लाख रुपए किया जाएगा। इस कानून का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
साथ ही अब 250 करोड़ रुपए से ज्यादा का लोन बैंक अकेले नहीं देगा। बैंकों के लिए साइबर सेक्योरिटी इंश्योरेंस का दायरा बढ़ाया जाएगा। वहीं वर्कशॉप के दौरान सभी बैंक में जारी किए गए एलओयू और एलओसी की जांच की गई, लेकिन कहीं कोई गड़बड़ी नहीं पायी गई है।
आपको बता दें कि स्विफ्ट वो सिस्टम है जो विश्व के सभी बैंकों का नेटवर्क बनाकर सुरक्षित फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन में मदद करता है।
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