पंजाब नेशनल बैंक के घोटाले का असर पूरे देश पर काफी ज्यादा पड़ा है। जिससे की अब भारतीय रिजर्व बैंक हर कदम फूंक-फूंक कर उठा रहा है। इसी के चलते अब गारंटी पत्र या LoU या लेटर ऑफ इंडरटेकिंग के जरिए बैंक गारंटी जारी करने की सुविधा पर रोक लगा दी है, क्योंकि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने आयात के लिए उपलब्ध इस सुविधा का दुरुपयोग कर देश में बैंकिंग के सबसे बड़े घोटाले को अंजाम दिया था। इसी को देखते हुए आरबीआई ने यह कदम उठाया है।
LoU और LoC दोनों पर लगी रोक
न केवल गारंटी पत्र पर बल्कि आश्वस्ति पत्र या LoC या लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया गया है। आश्वस्ति पत्र भी गारंटी पत्र की ही तरह होता है। इन पत्रों का उपयोग आयातकों द्वारा विदेश में जाने वाली खरीद के वित्तपोषण में किया जाता है।
तत्काल प्रभाव से लागू है निर्णय
रिजर्व बैंक ने अपने एक बयान में कहा है कि कुछ तय शर्तों के साथ साखपत्र एवं बैंक गारंटी जारी किया जाना बरकरार रहेगा। रिजर्व बैंक ने कहा कि गारंटी पत्र पर रोक लगाने का निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू है। साथ ही यह भी कहा गया है कि दिशा निर्देशों की समीक्षा के बाद आयात के लिए बैंकों द्वारा गारंटीपत्र जारी किए जाने की सुविधा पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
आयात में होगी बढ़ोत्तरी
ऐसा माना जा रहा है कि आरबीआई के इस फैसले के बाद देश में इंपोर्ट की लागत में लगभग आधे फीसदी की बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं। वहीं इस कदम के बाद कारोबारियों को आयात के लिए डॉलर की व्यवस्था करने की चुनौती भी बढ़ जाएगी। साथ ही विदेशी बैंके सामने भारतीय बैंक की साख पर भी सवाल खड़ा हो सकता है।
एलओयू का अर्थ
लेटर ऑफ अंडरटेकिंग यानी कि LoU बैंक द्वारा दिया गया एक बैंक गारंटी होता है जिसे ओवरसीज इंपोर्ट पेमेंट करने के लिए जारी किया जाता है। इसका मतलब है कि यदि लोन लेने वाला व्यक्ति लोन नहीं चुका पाता है तो इसके बाद एलओयू जारी करने वाला बैंक शर्त के हिसाब से ब्याज समेत रकम को चुकाता है। LoU एक निश्चित समय के लिए जारी किया जाता है। नीरव मोदी ने पीएनबी से कई एलओयू जारी कराया था।


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