बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों से परेशान भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकारी बैंकों के विशेष ऑडिट की प्रक्रिया शुरु की है। इस ऑडिट में मुख्य ध्यान व्यापारिक गतिविधियों के वित्तपोषणऔ रबैंकों द्वारा जारी किए जाने वाले गारंटी पत्रों (एलओयू) पर दिया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि आरबीआई ने सभी बैंकों से उनके द्वारा जारी किए गए एलओयू की जानकारी मांगी है। इसमें बकाया राशि की जानकारी भी मांगी गई है।
गहन जांच करेगा आरबीआई
आरबीआई यह भी देखेगा कि बैंकों के पास ऋण सीमा की पहले से अनुमति थी या नहीं और गारंटी पत्र जारी करने से पहले उनके पास पर्याप्त नकद मार्जिन उपलब्ध था या नहीं। एजेंसी व अन्य सूत्रों के मुताबिक, हाल में उजागर पंजाब नेशनल बैंक-नीरव मोदी धोखाधड़ी मामले समेत अधिकतर बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी मामले व्यापार वित्तपोषण से जुड़े हैं। इसके अलावा जानबूझ कर ऋण नहीं चुकाने के भी कई मामले व्यापार वित्त पोषण से जुड़े रहे हैं।
पीएनबी धोखाधड़ी के बाद उठाया ये कदम
हाल में पीएनबी के साथ किए गए 12,646 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी मामले में भी एलओयू का इस्तेमाल किया गया। इसे ध्यान में रखते हुए आरबीआई इस ऑडिट में इनसे जुड़े मामलों की भी जांच करेगा।
दिल्ली के हीरा निर्यातक पर दर्ज हुआ केस
उल्लेखनीय है कि नीरव मोदी का मामला सामने आने के तुरंत बाद सीबीआई ने दिल्ली के हीरा निर्यातक द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल के खिलाफ भी ओरिंएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में 389.85 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था।
दो अन्य व्यवसायियों ने भी 6 हजार करोड़ ठगे
द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल ने 2007- 12 के बीच ओबीसी से विभिन्न प्रकार की ऋण सुविधायें ली थीं। इसी प्रकार 2015 के बैंक ऑफ बड़ौदा धोखाधड़ी मामले में भी दिल्ली के दो व्यावसायियों ने बैंकों को व्यापार वित्तपोषण प्रणाली का इस्तेमाल करते हुये 6,000 करोड़ रुपए का चूना लगाया था।


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