अगर कोई भी व्यक्ति 50 करोड़ से अधिक के लोन की डिमांड करते है तो उससे सरकारी बैंक पासपोर्ट की डिटेल मांग सकते हैं। ताकि डिफॉल्ट या किसी प्रकार की गड़बड़ी के बाद वे देश से न भाग सकें। वित्त मंत्रालय सरकारी बैंकों को यह निर्देश दे सकता है। इससे पहले कैबिनेट ने भगोड़ा आर्थिक अपराध बिल को मंजूरी दी थी, जिसमें आर्थिक अपराध करके भागने वाले शख्स की पूरी संपत्ति जब्त करने की बात कही गई है। इस बिल को संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जा सकता है।

सरकारी बैंकों के अधिकारियों का कहना है कि हम बैंकों, जांच एजेसियों और दूसरे सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर किसी लोन अकाउंट में बैंक को गड़बड़ी की आशंका दिखती है तो वे उसकी जानकारी पहले ही जांच एजेंसियों को दे सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे फर्जीवाड़ा को रोकने में मदद मिलेगी और अपराधी बैंक और जांच एजेंसियों से बचने के लिए देश से फरार नहीं हो पाएंगे।
पिछले सप्ताह वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैंको को 50 करोड़ से अधिक के नॉन-परफॉर्मिंग लोन के सभी मामलों में किसी गड़बड़ी का पता लगाने को कहा था। वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि अगर उन्हें किसी गड़बड़ी का पता चलता है तो वो इसकी जानकारी सीबीआई ईडी, और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस को दें।


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