भारतीय अर्थव्यवस्था वापस से अपनी रफ्तार पकड़ रही है। बुधवार को केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2017-18 की तीसरी तिमाही में देश के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि 7.2% रही है। पिछले 5 क्वाटर्स में यह सबसे तेज ग्रोथ है, इससे पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी की मार से तेजी से उभरकर आगे बढ़ रही है।
सही तस्वीर
ग्रोथ का विश्लेषण भी एक सही चित्र प्रस्तुत कर रहा है। सकल स्थाई पूंजी निर्माण - निवेश को दर्शाने वाले इस मापक की वृद्धि 12% रही है। विनिर्माण 8.1% की दर से बढ़ा है जो कि पिछली तिमाही में भी इतना ही था। पिछली तिमाही के 2.7% के बजाय कृषिगत विकास 4.1% रहा है। पिछली तिमाही के 2.8% के बजाय निर्माण 6.8% बढ़ा है।
राजकोषीय घाटा बढ़ने का डर
इन नंबर्स में कहीं ना कहीं नोटबंदी और जीएसटी का नकारात्मक प्रभाव रहा है, और सरकार का खर्च भी इस पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, जिससे आगे जाकर केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ेगा।
नोमुरा की रिपोर्ट
फिर भी, कुछ क्वार्टर्स में अच्छी बातें देखने को मिली हैं। जापनी ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने एक नोट में कहा है कि कृषि में तेजी से उठाव उलझाने वाला है। उन्होने कहा है कि "तेजी से गति पकड़ना और कई क्षेत्रों में व्यापक सुधार हमें आश्चर्य में में डाल रहा है"।
जीडीपी को लेकर एक बहस छिड़ी
नोमुरा की इस टिप्पणी से भारत की जीडीपी को लेकर एक बहस छिड़ गई है। प्रश्न है कि 2016-17 के क्वार्टर 3 में अर्थव्यवस्था 7% की दर से बढ़ी है जब कि उस समय नोटबंदी की घोषणा हुई थी। इस समय पर, नोमुरा ने कहा कि जीडीपी के आंकड़े ‘फ़ैक्ट हैं या फिक्शन", उन्होने इस गड़बड़ी के लिए संगठित क्षेत्र के आंकड़ों पर ज़्यादा विश्वास करने का भी आरोप लगाया।
मॉर्गन स्टेनली की राय
2015 में, भारत ने जीडीपी को मापने का तरीका बदला और इसे फैक्टर कोस्ट का इनपुट लेने के बजाय बाजार मूल्यों का इस्तेमाल करके मापा जाने लगा। मॉर्गन स्टेनली इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के मुख्य वैश्विक रणनीतिकार रुचिर शर्मा के अनुसार यह सब इस "बैड जोक" का नतीजा है। इस नए तरीके के कारण जीडीपी बढ़ी हुई दिखी है। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने कोई भी पुराना डेटा नहीं दिया है कि इस नए तरीके के अंतर्गत पहले जीडीपी ग्रोथ को कैसे देखा जाता था, इससे अर्थशास्त्रियों के लिए इन नए आंकड़ों को लेकर अंधेरे की स्थिति है।
चीन से तुलना
इसमें चीन से तुलना की गई है, जिस पर पहले ही अपने जीडीपी के आंकड़ों से छेड़छाड़ करने के आरोप लगते रहे हैं। शर्मा ने जीडीपी की गणना के इस तरीके पर 2015 में टिप्पणी की कि "यह भारत को चीन की तुलना में ज़्यादा बुरा बना रहा है"। इसके साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा फरवरी में पेश किए गए बजट में बताए आंकड़ों पर कई सवाल हैं। और भी अगर बात करें तो, प्रधानमंत्री जी द्वारा पेश किए गए नौकरियों के डेटा प्रक्रियात्मक गड़बड़ियों को नज़रअंदाज़ किया गया है।
आर्थिक विकास
आर्थिक विकास किसी देश का सफलता का एक बड़ा महत्वपूर्ण मापक है। इसलिए, भारत सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला डेटा पुख्ता होना चाहिए, ताकि निवेशक और वोटर्स भ्रमित ना हों। वित्तीय आंकड़ों पर उठाए सवालों का समाधान जल्द से जल्द होना ज़रूरी है।
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