सेना प्रमुख बिपिन रावत ने गुरुवार को देश की सुरक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज जब उभरती हुई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की जरूरत है तब निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि राष्ट्र भीतरी व बाहरी खतरों से सुरक्षित है।

यहां सेना के वार्षिक सेमिनार में स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा, "आर्थिक विकास और सैन्य आधुनिकीकरण के साथ-साथ सशस्त्र बल का अस्तित्व बनाए रखना होगा। उन्हें एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है।" उन्होंने आगे कहा, "आर्थिक विकास तभी होगा जब देश सुरक्षित होगा।"
उन्होंने देश में एफडीआई लाने की बात से लेकर सेना के आधुनिकीकरण और देसी प्रौद्योगिकी के विकास का जिक्र किया। रावत ने कहा कि भारतीय प्रतिरक्षा बल राजकोष पर बोझ नहीं है क्योंकि वह आंतरिक व बाह्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान करता है।
सेना प्रमुख ने कहा, "नागरिकों को हमेशा इस बात की फ्रिक रहती है कि तीनों रक्षा सेवाओं को जो पैसा आवंटित किया जाता है उसका क्या होता है। रक्षा बजट राष्ट्र की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा के लिए होता है।"
उन्होंने कहा, "हम यहां ये बताना चाहते हैं कि हमारा रक्षा बजट जो राजकोष पर भार लगता होगा उसका एक बड़ा हिस्सा (30-35 फीसदी) सही मायने में राष्ट्र निर्माण पर खर्च होता है। अगर आप दूर-दराज के इलाकों में सड़क व मूलभूत ढांचे का निर्माण करते हैं तो उससे स्थानीय आबादी भी लाभान्वित होती है।"
उन्होंने कहा, "जहां सेना की तैनाती होती है वहां सेना के लोग अपने उपभोग के लिए स्थानीय उत्पाद खरीदते हैं जिससे उनकी आमदनी बढ़ जाती है।"


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