पंजाब नेशनल बैंक में हुए 11,400 करोड़ रुपए के घोटाले के सामने आने के बाद रेटिंग एजेंसी फिच ने बैंक को रेटिंग वाच निगेटिव की श्रेणी में रख दिया है। यह पीएनबी की रेटिंग घटाने का संकेत हो सकता है। फिच का कहना है कि बैंकिंग इतिहास के इस सबसे बड़े घोटाले से अंदर और बाहर जोखिम नियंत्रण एवं प्रबंधकीय निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। क्योंकि कई साल तक यह पकड़ में नहीं आ सका। फिच ने कहा है कि फिच रेटिंग ने पीएनबी में बड़े घोटाले का खुलासा होने के बाद उसे व्यावहारिकता रेटिंग की निगेटिव श्रेणी में रख दिया है।

फिच के अनुसार, व्यावहारिकता रेटिंग से किसी वित्तीय संस्थान की ऋण विश्वसनीयता का पता चलता है एवं संबंधित निकाय की असफलता का सूचक होता है। फिच नियंत्रण की असफलता के बारे में चीजें स्पष्ट होने एवं पीएनबी की वित्तीय स्थिति पर इसके असर को देखने के बाद एक बार फिर रेटिंग वाच का विश्लेषण करेगा।
फिच का कहना है कि इस घोटाले से बैंक की छवि को धक्का पहुंचा है और इसका पूंजी बाजार पर भी असर हुआ है। पीनएबी की जिम्मेदारियों, संभावित वसूली एवं अंदर और बाहर के स्त्रोतों से नई अतिरिक्त पूंजी के प्रबंध की निगरानी करेगा ताकि वह यह तय कर सके कि बैंक की वित्तीय स्थिति मौजूदा रेटिंग के स्तर की है या नहीं।
फिलहाल, फिच ने कहा है कि इस घोटाले से बैंक के सर्पोट रेटिंग फ्लोर पर असर पड़ने की आशंका कम है क्योंकि दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक बैंक होने के नाते यह बैंकिंग प्रणाली में काफी महत्वपूर्ण है।


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