सहारा ग्रुप की एंबी वैली को टुकड़ों में बेचने की इजाजत सुप्रीम कोर्ट ने दी है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार वैली के अलग-अलग हिस्सों में बांटकर नीलामी की जाएगी। आपको बता दें की पुणे की पूरी एंबी वैली का कोई खरीददार नहीं मिलने के बाद बाम्बे हाई कोर्ट की ओर से नियुक्त किए गए लिक्विडेटर ने सुप्रीम कोर्ट से एंबी वैली की संपत्ति को टुकड़ों में बेचने की इजाजत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने लिक्विडेटर और रिसीवर को इसकी इजाजत दे दी है।
19 अप्रैल तक अलग-अलग संपत्तियों की हो सकती है नीलामी
अदालत ने बुधवार को कहा है कि अगर जरुरत पड़े तो 19 अप्रैल तक एंबी वैली की टुकड़ों में नीलामी की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि संपत्ति जैसे गोल्फ कोर्स, रेस्तरां, कान्वेंशन हॉल, हवाई पट्टी आदि को अलग-अलग बेचा जा सकता है क्योंकि सभी 48 संपत्तियों को साथ में बेचा नहीं जा पा रहा है। सहारा की तरफ से कोर्ट में कहा गया है कि हमने डिजिटलाइजेशन में 50 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जिन्हें पैसा दिया गया है उनका वेरिफिकेशन किया जाएगा और जल्द मामले की सुनवाई हो।
अब तक सिर्फ दो लोगों ने वैली को खरीदने में दिखाई है रुचि
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टि रंजन गोगोई और जस्टिस ए.के सीकरी की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 अप्रैल को होगी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी गई कि दो भारतीय कंपनियों महिंद्रा लाइफस्पेस डेवलपर और परिमल ग्रुप ने इन संपत्तियों को खरीदने में दिलचस्पी ली है।
सहारा और सेबी के बीच चल रहा है मुकदमा
SEBI और सहारा ग्रुप के बीच निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपए लौटाने को लेकर मुकदमा चल रहा है। इसी राशि के हिस्से के रुप में समूह को 9 हजार करोड़ रुपए कोर्ट में जमा कराने हैं। सहारा ने इसके लिए कोर्ट से 18 सप्ताह का समय मांगा था, जिसे खारिज करते हुए कोर्ट ने एंबी वैली को नीलाम करने का आदेश दिया था।
1 साल से होने वाले हैं इस मामले को
23 नवंबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने एंबी वैली की नीलामी के लिए फिर से बोली लगवाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने 1 दिसंबर से नीलामी की प्रक्रिया शुरु करने का आदेश दिया था। पूरी 1 साल होने वाले हैं एंबी वैली की नीलामी को लेकर लेकिन अभी तक कोई ऐसा खरीददार नहीं मिला है जो इसे पूरी तरह से खरीद ले।


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