पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) को लेकर केंद्र सरकार बड़े फैसले लेने जा रही है। सरकार के अनुसार पीपीएफ कानून को अब खत्म कर दिया जाएगा। वित्त विधेयक-2018 लागू होने के बाद जहां PPF खत्म होगा वहीं इसके जैसे अकाउंट बचत खातों में बदल दिए जा सकते हैं। आपको बता दें कि केंद्र सरकार पब्लिक प्रॉविडेंट फंड जैसी सभी छोटी योजनाओं के लिए एक जैसी व्यवस्था करने जा रही है और सरकार के द्वारा चलाई जा रही 10 प्रमुख बचत योजनाओं के खाते बचत खातों में बदलने की बात हो रही है।
नए निवेशकों को नहीं मिलेगा फायदा
PPF कानून समाप्त हो जाने के बाद उन लोगों को ज्यादा ब्याज का फायदा नहीं मिलेगा, जो नया निवेश करेंगे। सभी निवेश सरकारी बचत बैंक कानून 1873 के अनुसार होंगे। फिर लोगों को उसमें ज्यादा ब्याज मिलता रहेगा, जिन्होंने वित्त-विधेयक-2018 लागू होने से पहले से निवेश कर रखा है।
ये हैं 10 बचत खाते
फिलहाल, नई व्यवस्था तभी लागू हो पाएगी जब संसद से यह विधेयक पारित हो जाएगा। पीपीएफ एक्ट खत्म होने की स्थिति में डाकघर बचत खाते, नेशनल सेविंग मंथली इनकम, नेशनल सेविंग आरडी अकाउंट, सुकन्या समृद्धि खाता, नेशनल सेविंग टाइम डिपॉजिट (1,2,3, और 5 साल), वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, NSC, किसान विकास पत्र और पीपीएफ जैसी योजनाओं पर असर होगा।
नई व्यवस्था में नहीं मिलेगी यह सुविधा
आपको बता दें कि वित्त विधेयक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सभी योजनाओं की मौजूदा ढ़ांचे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन एक बड़ा नुकसान यह होगा कि फिलहाल पीपीएफ खाते कोर्ट द्वारा जब्ती मुक्त होते हैं, जबकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह सुविधा खत्म हो जाएगी।
पहले जैसी लाभकारी नहीं रह जाएगी योजना
अगर वित्त विधेयक का यह बिल संसद में पास कर दिया जाता है तो लोक भविष्य निधि (PPF) जैसी लोकप्रिय योजना नए निवेशकों के लिए पहले जैसी लाभकारी नहीं रह जाएंगी। लेकिन पुराने निवेशकों का परिवक्ता के समय तक खाता चलता रहेगा।


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