217 साल बाद महिलाओं को मिल सकेगा समान वेतन!

भारत ने भले ही विश्व बैंक रैंकिंग में उच्च स्कोर हासिल किया हो परंतु विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) समग्र के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स रैंकिंग में भारत का स्थान पिछड़ता हुआ नज़र आया। डब्ल्यूईएफ में भारत 21 स्थान पीछे हट कर 108 स्थान पर मौजूद है, इस तरह यह चीन और बांग्लादेश से भी पीछे नज़र आया। इस गिरते दर्जे की मुख्य वजह अर्थव्यवस्था में महिलाओं की कम भागेदारी और उन्हें मिलने वाला कम वेतन है।

217 साल का इंतजार

217 साल का इंतजार

डब्ल्यूईएफ के अनुसार, कार्यस्थल में समान वेतन पाने में विश्वभर की महिलाओं को दो सदियों तक का इंतजार करना पड़ सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागेदारी बहुत कम है (144 देशों में भारत 136 स्थान पर है) और कम वेतन के कारण यह 136 स्थान पर है। डब्ल्यूईएफ का कहना है, औसतन, 66 प्रतिशत महिलाओं को भारत में वेतन नहीं दिया जाता, जबकि पुरुषों की गिनती केवल 12 प्रतिशत है।

क्षेत्र जिनमें महिलाओं की भागेदारी कम है

क्षेत्र जिनमें महिलाओं की भागेदारी कम है

विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों, प्रबंधकों, पेशेवरों तथा तकनीकी श्रमिकों के क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी काफी कम नज़र आती है। महिलाओं की हिस्सेदारी को बढाने के लिए इन क्षेत्रों में अधिक प्रयास करने की जरूरत है।

हमारा स्थान

हमारा स्थान

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के मुकाबले 67 प्रतिशत लिंग अंतर कम किया है। इस श्रेणी में हमारा पड़ोसी देश बांग्लादेश 47 स्थान पर है और चीन 100 वें स्थान पर हैं।

विश्व स्तर पर इसका मापदंड

विश्व स्तर पर इसका मापदंड

इस साल के नतीजे काफी अच्छे नहीं है। डब्ल्यूईएफ जेंडर गैप को स्वास्थ्य, शिक्षा, कार्यस्थल और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के आधार पर मापता है और यह बात सामने आई है कि जेंडर गैप काफी बढ गया है। "एक दशक से चल रहा धीमी गति के विकास ने इस अंतर को बढा दिया है और यह बात 2017 में सामने आई, जबकि डब्ल्यूईएफ ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट पहली बार 2006 में प्रकाशित हुई थी।

कौन है सूची में सबसे ऊपर

कौन है सूची में सबसे ऊपर

ग्लोबल जेंडर गेप इंडेक्स पर सबसे ऊपर है आइसलैंड। इस देश ने अपना जेंडर गेप करीब 88 प्रतिशत कम किया है। यह नौ सालों से दुनिया का सबसे लिंग-समान देश रहा है। टॉप 10 देशों में नॉर्वे (दूसरे स्थान पर), फिनलैंड (तीसरे स्थान पर), रवांडा (चौथे स्थान पर) और स्वीडन (पांचवें स्थान पर), निकारागुआ (छटे स्थान पर) और स्लोवेनिया (सातवें स्थान पर), आयरलैंड (आठवें स्थान पर), न्यूजीलैंड (नौ वें स्थान) और फिलीपींस (दसवें स्थान पर) है।

अच्छी खबर

अच्छी खबर

भले ही भारत कार्यस्थल पर लैंगिक अंतर में सुधार नहीं ला पाया परंतु प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा नामांकन लिंग अंतराल में काफी सुधार नज़र आया है और पहली बार भारत ने अपना तृतीयक शिक्षा लैंगिक अंतर को ना के बराबर कर दिया है। हालांकि, स्वास्थ्य सुधारों के मामले में भारत बहुत ही अधिक पीछे है, डब्ल्यूईएफ के अनुसार, एक दशक से, स्वास्थ्य के मामले में भारत उप-सूचकांक पर सबसे कम उन्नती प्राप्त करने वाला देश है।

More From GoodReturns

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+