पूर्व वित्तमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा कि वित्तमंत्री अरुण जेटली ने यह साबित किया है कि सरकार की विशाल स्वास्थ्य योजना एक 'जुमला' है, क्योंकि इस पहल के लिए किसी रकम का इंतजाम तो किया ही नहीं गया है, जिसे सरकार का अबतक का सबसे बड़ा स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम करार दिया गया है।
हेल्थ केयर को बताया जुमला
चिदंबरम ने कहा, "कल मैंने कहा था कि नई स्वास्थ्य देखभाल योजना एक 'जुमला' है, क्योंकि बजट में इसके लिए धन का प्रावधान नहीं किया गया है। आज (वित्तमंत्री ने) स्वीकार किया है कि धन का कोई भी प्रावधान नहीं किया गया है और वे भविष्य में इसके लिए पूंजी जुटाएंगे। शानदार जुमला है।"
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना पर उठे सवाल
जेटली ने अपने बजट भाषण में गुरुवार को एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) की घोषणा की थी, जिसके तहत 10 करोड़ गरीब परिवारों (50 करोड़ लोगों) को पांच लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा। इस प्रस्तावित योजना को लेकर कांग्रेस ने कहा कि इसके लिए विशाल धन की जरूरत है, लेकिन अभी तक कोई भी रकम मुहैया ही नहीं कराई गई है। इस योजना के एलान के बाद से ही इसकी तुलना अमेरिका की प्रसिद्ध स्वास्थ्य योजना ओबामा केयर से की जाने लगी। तमाम लोगों ने और मीडिया ने इसे 'मोदी केयर' नाम दिया। अब पूर्व वित्तमंत्री ने इस योजना पर कुछ गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
5 लाख करोड़ रुपए की जरूरत
चिदंबरम ने कहा, "10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपए प्रति परिवार मुहैया कराना एक जुमला है। यह योजना 10 करोड़ परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। अगर हर परिवार योजना के पांच लाख रुपए का 10वां हिस्सा भी प्राप्त करता है तो इस योजना को चलाने के लिए पांच लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी।"
धन का आवंटन किए बिना योजना का एलान
उन्होंने कहा कि अगर बीमा कंपनियों के माध्यम से इस योजना को चलाया जाता है तो प्रति परिवार अनुमानित प्रीमियम 5000 रुपए से लेकर 15,000 रुपए तक होगी। सरकार के हर साल इस योजना पर 50,000 करोड़ रुपए से लेकर 1.5 लाख करोड़ रुपए तक खर्च करने की जरूरत होगी। लेकिन धन का आवंटन ही नहीं किया गया। पूर्व वित्तमंत्री ने पूछा, "क्या वित्तमंत्री गंभीर हैं?"


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