आम बजट 2018 पेश हो चुका है यहां पर हम बजट की सभी हाइलाइट आपको विस्तार से बता रहे हैं। तो अगर आप भी आम आदमी की कैटेगरी में आते हैं तो यह खबर पढि़ए और अपनी प्रतिक्रिया हमें दीजिए। बजट की सभी हाइलाइट आपको आगे की स्लाइड में पढ़ने को मिलेंगी।
स्टैण्डर्ड डिडेक्शन (मानक कटौती)
वेतनभोगियों के लिए सरकार ने एक बड़ा ऐलान किया है। सबसे पहले तो इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। उसके बाद स्टैण्डर्ड डिडेक्शन स्कीम फिर से लागू होगी और अब स्टैण्डर्ड डिडेक्शन की सीमा बढ़ाकर 40,000 कर दिया जाएगा। तो वहीं 40,000 तक मेडिकल बिल फ्री होगा। यानी कि सैलरी से 40,000 घटाकर टैक्स लगेगा।
स्टॉक मार्केट इन्वेस्टर्स पर आम बजट का प्रभाव
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कई सरकारी कंपनियां शेयर बाजार में आएंगी। साथ ही कंपनियों के विनिवेश के लिए 1 करोड़ जुटाए जाएंगे। इसके अलावा 14 सरकारी कंपनियां शेयर बाजार में आएंगी। एक साल बाद शेयर बेचने वाले इक्विटी निवेशकों को दीर्घकालिक पूंजी लाभ कर का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। अब, इक्विटी निवेशकों को एक साल की अवधि के बाद लाभ पर शेयरों की बिक्री पर 10 फीसदी कैपिटल गेन टैक्स देना होगा।
लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को लाभ के शेयरों की बिक्री पर लगाया गया है, जबकि अल्पावधि पूंजीगत लाभ 15 फीसदी पर है।
वरिष्ठ जनों के लिए अच्छा रहा आम बजट
बुजुर्गों को डिपॉजिट पर ब्याज अब टैक्स फ्री मिलेगी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए एफडी पर कर छूट है और धारा 80 डी के तहत स्वास्थ्य बीमा कर लाभ बढ़ाया गया है। इसलिए, वरिष्ठ नागरिक अब स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर 50,000 रुपये तक कर छूट का दावा कर सकते हैं, जो कि वर्तमान में 30,000 रुपये के मुकाबले ज्यादा है।
बैंक एफडी और पोस्ट ऑफिस की योजनाएं वरिष्ठ नागरिकों के लिए 10,000 रुपये का आयकर लाभ आकर्षित करेगी। इस के अलावा 7.5 लाख रूपये प्रति वरिष्ठ नागरिक सीमा, जो कि एलआईसी योजनाओं में निवेश के लिए दी गई है, को दोगुनी होकर 15 लाख कर दिया गया है।
कर्मचारियों के लिए ईपीएफ लाभ
इस बजट से महिला कर्मचारियों को काफी उम्मीदें थी। कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम में एक संशोधन प्रस्तावित किया गया है, जिसके तहत कर्मचारियों को ईपीएफ खाते में नियोक्ता के योगदान को प्रभावित किए बिना 8% वेतन में योगदान देना होगा। तो वहीं नई नौकारियों पर 12 प्रतिशत ईपीएफ मिलेगा एवं निश्चित अवधि के रोजगार की सुविधा भी बढ़ा दी गई है।
म्यूचुअल फंड पर टैक्स
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी 10 प्रतिशत की दर से इक्विटी उन्मुख म्यूचुअल फंड की वितरित आय पर कर की घोषणा की। जो लोग इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में पैसे डालने का काम कर रहे हैं यह उन इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए अच्छी खबर नहीं है।
निवेशकों के लिए गोल्ड पॉलिसी
सरकार एक व्यापक स्वर्ण नीति स्थापित करने और सोने की मुद्रीकरण योजना में सुधार करने की योजना बना रही है। एक यह सुनिश्चित नहीं है कि यह व्यावहारिक है और क्या यह निवेश पर असर डालेगा क्योंकि पिछले समय की नीतियों जैसे सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) योजना की प्रतिकिया कुछ अच्छी देखने को नहीं मिली है। गोल्ड ईटीएफ और SGB पर निवेश वर्ग के रूप में निवेशक फिजिकल गोल्ड को पसंद करते हैं। सरकार फिजिकल गोल्ड की खपत को रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक नतीजे खराब ही हैं।
गरीबों के लिए स्वास्थ्य बीमा
सरकार ने एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया है जो 5 करोड़ से अधिक लोगों का बीमा करेगा। एक व्यक्ति के लिए 5 लाख रुपये की राशि होगी। स्वास्थ्य बीमा योजना से 50 करोड़ लोगों को होगा फायदा एवं 40 फीसदी आबादी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में आएगी।
स्वास्थ्य सेवा
आपको बता दें की सरकार की नई स्वास्थ्य बीमा योजना से 50 करोड़ लोगों को होगा फायदा होगा एवं 40 फीसदी आबादी स्वास्थ्य बीमा के दायरे में आएगी। 5 संसदीय क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेज खुलेंगे। लोगों को फ्री में दवाइयां देने की सरकारी योजना आएगी एवं हेल्थ वेलनेस सेंटर के लिए 1200 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा 5 लाख नए स्वास्थ्य केंद्र खुलेंगे।
शिक्षा के क्षेत्र में सौगात
हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने का प्लान है। जिसके अंतर्गत नर्सरी से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए एक तकनीकि बनाई जाएगी। 1 हजार छात्रों को आईआईआईटी से पीएचडी की सुविधा दी जाएगी एवं अध्यापकों के ट्रेनिंग के लिए डिजिटल पोर्टल प्रदान किया जाएगा। आपको बता दें कि शिक्षा और स्वास्थ्य शेश 3 से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गया है।
राजकोषीय घाटा
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटा अनुमान में संशोधन करते हुए उसे 3.2 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 फीसदी कर दिया है। आगामी वित्त वर्ष 2018-19 का आम बजट लोकसभा में पेश करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष में वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) का 3.5 फीसदी यानी 5.9 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। सरकार के मुताबिक महंगाई बढ़ने के कारण वित्तीय घाटे में इजाफा हो सकता है। इससे पूर्व सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2017-18 में वित्तीय घाटा जीडीपी का 3.2 फीसदी रहने का अनुमान जारी किया था।
वित्तमंत्री ने चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार का संशोधित व्यय 21.47 लाख करोड़ से बढ़ाकर 21.57 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद जाहिर की है।
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