इस बात में कोई शंका नहीं है कि वर्तमान सरकार, सत्ता में बने रहने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। सन् 2015 में पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने चार वर्ष की अवधि में कॉरपोरेट टैक्स की दर में 25 प्रतिशत तक की कटौती करने का प्रस्ताव दिया था, जो कि औसत कॉरपोरेट टैक्स का 21.91 प्रतिशत था। बजट के दौरान अपने भाषण में जेटली ने कहा था कि 30 प्रतिशत पर भारत में कॉरपोरेट टैक्स की मूल दर, अन्य प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में मौजूद दरों से अधिक है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा है कि कॉरपोरेशन टैक्स का प्रभावी कलेक्शन, लगभग 23 प्रतिशत होगा।

हालांकि, इंडिया इंक ने एक लम्बे समय तक संयम से इस रोड़मैप का इंतजार किया है, सामान्य चुनावों से पहले पिछला बजट ख़ास पसंद नहीं किया गया था।
हाल ही में, दावोस में भारतीय मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आकस्मिक टिप्पणी से शुरूआत करते हुए, उन्होंने कहा कि 'फिलहाल आप सभी मेरे साथ काफी प्रसन्न लग रहे हैं, देखते हैं कि बजट पेश होने के बाद आप क्या कहते हैं।'
भारत के राजकोषीय घाटे का बहुत पुख्ता सबूत है, जिसकी वजह से पांच वर्षों में पहली बार मौजूदा वित्तीय वर्ष में जीडीपी के 3.2 प्रतिशत के टारगेट के भंग होने की उम्मीद की जा रही है।
पूर्व-बजट नोट में गोल्डमैन सैच ने कहा, 'कमजोर आर्थिक विकास के संदर्भ में, हम मानते हैं कि जेटली को महत्वपूर्ण राजकोषीय संतुलन (जोकि उच्च मुद्रास्फीति और उच्चतर ब्याज दर में शामिल हो सकता है) से समझौता किए बिना विकास का समर्थन करने में मुश्किल आ सकती है।'
पहले से ही, मुद्रास्फीति में बढ़ोत्तरी, नकदी की स्थिति में तंगी और कम वित्तीय व्यवस्था के बारे में चिंताओं को लेकर भारत का बॉन्ड बाजार तेजी से सेल-ऑफ हुआ है। एक बजट जोकि अगले वित्तीय वर्ष में घाटे को बढ़ा सकता है, सेल-ऑफ हो सकता है और बांड की स्थिति में बढोत्तरी हो सकती है, जोकि सरकार द्वारा विकास को बढ़ाने के परिणामस्वरूप होगा। यह दर्शाता है कि आखिरकार सरकार क्यों कॉरपोरेट टैक्स को कम करने और राजकोषीय घाटे को पटरी पर लाने के लिए तैयार नहीं हो सकती है।
कॉरपोरेट सेक्टर में तीन अन्य कारण भी इस निराशाजनक स्थिति के लिए जिम्मेदार होते हैं। हाल ही में हुई गड़बड़ी के बावजूद, इसके साथ शुरूआत करने पर, जीएसटी राजस्व दबाव के तहत रहेगा। फिर, सरकार इस साल कृषि के क्षेत्र में भी खर्च करने के लिए बजट में सबसे ज्यादा प्राथमिकता देगी जिससे भारत का एक वर्ग काफी खुश हो जाएगा। आखिरकार, लेकिन कम से कम पिछले साल राहुल गांधी जोकि विपक्ष पार्टी कांग्रेस के नेता है; ने गुजरात चुनावों के दौरान मोदी पर तंज कसा था और कहा था कि सरकार को टैक्स में कटौती करने के लिए आश्वासन देने के बाद उस पर कुछ काम भी करना चाहिए था।
परन्तु इस बात से कोई भी इंकार नहीं कर सकता है कि भारत के लिए कुछ न करना ही सबसे घातक है। ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के अनुसार, मोदी को एक आर्थिक व्यवस्था को समर्थन देने के लिए मदद हेतु लगातार निवेश करते रहना होगा ताकि चार साल से हो रहा धीमा विकास लगातार जारी रहे। ऐसे समय में, जब विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और जापान जैसे देश दूसरों की पसंद से व्यापार कर रहे हों, उस हालात में भारत को ऐसी ट्रिक को फॉलो करना बहुत जरूरी है।
हैदराबाद में ईआई के एक टैक्स पार्टनर जयेश संघवी ने ब्लूमबर्ग से कहा, "यूएस ने कॉरपोरेट कर दरों को प्रतिस्पर्धी बना दिया है और भारत को जवाब देने की आवश्यकता है।" अगर ऐसा नहीं होता है तो कॉरपोरेट, 10-15 प्रतिशत अंको के अंतर के मुकाबले से कॉरपोरेट्स मध्यस्थता के अवसरों की जांच करेंगे।
विदेशी निवेशकों की आवाजाही, निश्चित रूप से पर्याप्त है। यूकेआईबीसी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफीसर केविन मैकोक ने कहा, "हमने कॉरपोरेट टैक्स को कम करने के लिए सरकार से अपील की है, और एक सरल व अनुमान लगा सकने वाले करशासन को लाने को कहा है ताकि भारत में यूके के निवेश को प्रोत्साहन मिल सकें। संयोगवश, ब्रिटेन भारत में सबसे बड़ा जी20 निवेशक है जिसने लगभग 24 अरब डॉलर का देश में निवेश किया है।
कॉरपोरेट टैक्स को कम करने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि इंडिया इंक अभी भी उम्मीद से बाहर है। हाल ही में डेलॉइट सर्वे के अनुसार, सभी क्षेत्रों में 120 प्रोफेशनलों को कवर करते हुए, 50 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने उम्मीद जताई है कि कॉरपोरेट टैक्स की दरों में कमी आएगी। फिक्की के अध्यक्ष राशेष शाह का कहना है कि अगर सरकार इसे कटौती करते हुए 28 प्रतिशत तक भी ले आती है तो लोगों को खुशी होगी, सरकार इसके लिए कुछ प्रयास कर भी रही है।
हालांकि, वित्त मंत्रालय में सूत्रों का कहना है कि रियायतें छोटे व्यवसायों और छोटे करदाताओं तक सीमित हो सकती हैं। 500 मिलियन या उससे कम के वार्षिक कारोबार वाले फर्मों में पहले से ही 30 प्रतिशत के मानक कर से कम 25 प्रतिशत का कर लगाया जाता है लेकिन उसमें एक ऐसा प्रस्ताव है कमतर टैक्स बैंड में कारोबार को अधिक टर्नओवर के साथ व्यापार को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है।
कॉरपोरेट टैक्स के साथ टिंकर करने वाले अंतिम वित्तीय मंत्री, पी. चिदम्बरम थे जिन्होंने 2005 में ब्याज दर को घटाकर 35 प्रतिशत से 30 प्रतिशत कर दिया था। इंडिया इंक अब इसके और कम होने की आस लगाये हुए है।
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