1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इस बार ज्वेलर्स को राहत मिल सकती है। समाचार पोर्टल मनी कंट्रोल ने सूत्रों के हवाले से खबर प्रकाशित करते हुए लिखा है कि, नीति आयोग में गठित वातल कमिटी ने वित्त मंत्रालय को सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करने का सुझाव दिया है।
इंपोर्ट ड्यूटी पर लॉन्ग टर्म पॉलिसी बनाए सरकार
सुझाव ये भी है कि सरकार सोने पर लॉन्ग टर्म पॉलिसी बनाए और इसके लिए गोल्ड बोर्ड और बुलियन एक्सचेंज शुरू किया जाए। वैसे सिफारिशें बहुत हैं और इससे पहले भी होती रही हैं, लेकिन काले धन और करंट अकाउंट घाटा बढ़ने की आशंका से सरकार इस सेक्टर को पिछले कई सालों से नजरअंदाज करती रही है। तो क्या इस बजट में सोने के दिन वापस लौटेंगे।
इंपोर्ट ड्यूटी को खत्म करे या कम करे सरकार!
नीति आयोग का सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने का सुझाव है। लेकिन वातल कमिटी का इंपोर्ट ड्यूटी खत्म करने का सुझाव है जिसे वित्त मंत्रालय के पास भेजा गया है। फिलहाल सोने पर 10 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगती है। दरअसल, सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी खत्म करने के लिए वातल कमिटी वित्त मंत्रालय के तहत गोल्ड बोर्ड बनाएं जाने की सिफारिश की है। इस बोर्ड के तहत सोने से जुड़ी सभी पॉलिसी गोल्ड बोर्ड में लाई जाये। साथ ही सोने की खरीद-बिक्री के लिए बुलियन एक्सचेंज बने।
इंपोर्ट ड्यू्टी को घटाकर 4% करने की मांग
सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर 4 फीसदी करने की डिमांड ज्वेलर्स कारोबारियों की ओर से की जा रही है। ज्वेलर्स कारोबारियों की डिमांड है कि सरकार ज्वेलरी के एक्सपोर्ट बढ़ाने पर फोकस दें क्योंकि करीब 80 फीसदी सोने का ज्वेलरी बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। नवंबर तक ज्वेलरी एक्सपोर्ट में करीब 5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी।
ज्वैलर्स को अशोक चक्र सिक्के बेचने का मिले अधिकार
ज्वेलर्स कारोबारियों की सरकार से मांग है कि सरकार ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग पूरी तरह से लागू करने की मजबूत व्यवस्था बनाएं और ज्वेलर्स को भी अशोक चक्र सिक्के बेचने की इजाजत दें। भारत में सोने का बाजार देखें तो साल 2013 में सालना 975 टन सोना इंपोर्ट हुआ था जबकि साल 2014 में सालना 811 टन सोना इंपोर्ट किया गया था। वहीं साल 2017 में सालना 846 टन सोना इंपोर्ट किया गया था।


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