विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन में शिरकत करने के लिए सोमवार को दावोस रवाना होने से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भारत के अनुबंध के लिए अपने दर्शन को साझा करने की उम्मीद करते हैं। दावोस के लिए प्रस्थान करने से पहले रविवार को जारी बयान में प्रधानमंत्री ने कहा, "समकालीन अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के सामने मौजूद व आने वाली चुनौतियों और वैश्विक शासन प्रणाली की संरचना में दुनियाभर के नेताओं, सरकारों, नीति निर्माताओं, कॉरपोरेट, सिविल सोसायटी का गंभीर से ध्यान देने की जरूरत है।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "सही मायने में पिछले कुछ वर्षो में भारत का संबंध दुनिया के देशों के साथ प्रभावकारी ढंग से बहुआयामी बना है। राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा व अन्य क्षेत्रों में विश्व के देशों के साथ हमारे अनुबंध हुए हैं"। पीएम मोदी ने कहा कि, दावोस में मैं अपने दर्शको को साझा करते हुए भारत का अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भविष्य के अनुबंध की उम्मीद करता हूं।
पिछले दो दशक में इस आर्थिक मंच के सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले मोदी देश के प्रथम प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा ने 1997 में दावोस सम्मेलन में शिरकत की थी। मोदी के इस दौरे के महत्व को बताते हुए विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) विजय गोखले ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि 1997 में भारत की अर्थव्यवस्था 1000 अरब डॉलर से भी कम की थी, लेकिन आज यह 2,000 अरब डॉलर से ज्यादा की हो गई है।
दावोस में मुख्य कार्यक्रम 23 जनवरी के पूर्ण सत्र के दौरान मोदी का भाषण होगा। मोदी ने अपने बयान में कहा कि डब्ल्यूईएफ कार्यक्रम के अलावा वह स्विटजरलैंड के राष्ट्रपति अलेन बेरसेट और प्रधान मंत्री स्टेफन लोफवेन से द्विपक्षीय बातचीत की उम्मीद जाहिर की। उन्होंने कहा, " मैं आश्वस्त हूं कि ये द्विपक्षीय बैठकें फलदायी रहेंगी।"


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