2018 में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा। सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट की तरफ से जारी एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया कि 2018 में भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और वो चीन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ देगी। इसके अलावा 2018 में ही भारत इक्विटी मार्केट के मामले में दुनिया का 5वां सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा।
7.5% की तेजी से बढ़ेगी जीडीपी
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक ऐसे समय जब अमेरिका समेत दुनिया के तमाम विकसित की जीडीपी दर 2 से 3 फीसदी के बीच है, भारत की 7.5 जीडीपी की दर से विकास करेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था में आई तेजी, चीन की जीडीपी दर से भी ज्यादा होगी। बता दें कि हाल ही में चीन के जीडीपी दर में गिरावट देखने को मिला है।
फिच ने भी माना भारत का लोहा
5.5 होगी चीन की जीडीपी इससे पहले दुनिया की मानी जानी रेटिंग संस्था, फिच ने भी एक रिपोर्ट में कहा था कि अगले 5 सालों में चीन की जीडीपी जहां 5.5 प्रतिशत रहेगी वहीं भारत की जीडीपी विकास दर 6.7 रहेगी। फिच ने इसके पीछे भारत के युवाओं को वजह बताई है। फिच ने बताया कि पूरी दुनिया में इस समय सबसे ज्यादा युवा जनसंख्या भारत में है। युवा आबादी के ही चलते भारत अगले 5 सालों में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगी।
भारत की जीडीपी में गिरावट अस्थाई
गिरावट के बाद बढ़त की तरफ भारत की जीडीपी बता दें कि हाल ही में भारत की जीडीपी दर में गिरावट देखने को मिली थी। जून तिमाही में भारत की जीडीपी दर 5.7 प्रतिशत हो गई थी लेकिन इस बीच जीडीपी में फिर से तेजी आनी शुरू हो गई है। आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी की दर 6.7 रहने का अनुमान लगाया है। विश्व बैंक ने भी हाल में जारी अपनी एक रिपोर्ट में भारत की जीडीपी में गिरावट की दर को अस्थायी बताते हुए कहा था भारत आने वाले समय में तेजी से विकास करेगा।
कुपोषण की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
हालांकि एक रिसर्च पेपर ने जीडीपी के आंकड़ों को लेकर भारत की चिंता बढ़ा दी है। शोध पत्र में कहा गया है कि भारत को कुपोषण के कारण अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब चार फीसदी की क्षति होती है। लेकिन, खाद्यान्नों के उत्पादन विविधता के साथ-साथ व्यापक पैमाने पर पोषक तत्वों से खाद्य पदार्थो को संपुष्ट करने से इसके विपरीत परिणाम आ सकते हैं।
चार फीसदी जीडीपी की क्षति
उद्योग संगठन एसोचैम और कंसल्टेंसी फर्म ईवाई की ओर से संयुक्त रूप से प्रकाशित एक शोध पत्र के मुताबिक, विविध प्रकार के कुपोषण के कारण चार फीसदी जीडीपी की क्षति होती है। रपट में कहा गया है कि महिलाओं और बच्चों पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत है। दुनिया के करीब 50 फीसदी कुपोषित बच्चे भारत में हैं। शोध पत्र में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के आंकड़ों का जिक्र किया गया है, जिसमें छह से 59 महीने के करीब 60 फीसदी बच्चों को रक्तहीनता से पीड़ित बताया गया है।
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