बजट 2018: इक्विटी म्‍यूचुअल फंडों में लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गेन्‍स की संभावना

एक संभावना है कि इक्विटी म्यूचुअल फंडों पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्‍स 2018-19 के केंद्रीय बजट में लाया जाएगा। फिलहाल इक्विटी म्यूचुअल फंड अगर एक वर्ष के बाद बेचा जाता है तो किसी टैक्स को आकर्षित नहीं किया जाता है। हालांकि, यदि आप एक साल पहले अपनी इक्विटी म्यूचुअल फंड बेचते हैं, तो 15 फीसदी कर देयता है।

Union Budget 2018: Long Term Capital Gains On Equity Mutual Funds Likely

विश्वास के चलते शेयरों और म्यूचुअल फंडों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लगाया जाएगा। सरकार को अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर संसाधनों की आवश्यकता होगी, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र, इक्विटी शेयरों और म्यूचुअल फंडों पर कराधान से हो सकता है। साथ ही यह भी याद रखें, अगले साल चुनाव होंगे और सरकार को कृषि क्षेत्र में तेजी लाने की जरूरत है।

साथ ही, अगर यह लागू किया जाता है तो अच्छी बात यह होगी कि यह सोने, रीयल इस्टेट इत्यादि जैसे अन्य परिसंपत्ति वर्गों के बराबर होगी, जहां दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ टैक्‍स होता है। फिलहाल इक्विटी शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड का इस्तेमाल सोने और इक्विटी म्यूचुअल फंड जैसे अन्य परिसंपत्ति वर्गों की तुलना में बहुत अलग तरीके से किया जाता है। ऐसा क्यों होना चाहिए?

म्यूचुअल फंड्स से आने वाले निवेश के कारण शेयर कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जो सेंसेक्स के 35,000 अंकों की गिरावट के साथ है। पिछले एक साल में म्यूचुअल फंड में निवेशकों को भी 20 से 60 प्रतिशत का रिटर्न मिला है। जरा सोचिए ऐसे लोगों पर कोई टैक्स नहीं है, अगर वे एक वर्ष के बाद अपना निवेश बेचते हैं, जो कि अनुचित है।

एक लांग टर्म कैपिटल गेन्‍स टैक्स म्यूचुअल फंड में निवेशकों से रिटर्न की उम्मीद को कम कर सकता है और सरकार सभी अलग-अलग निवेशों को काफी मज़बूत करने में मदद करेगी।

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