प्राइवेट हो या फिर सरकारी सभी कंपनियों को पीएफ के मामले में सावधान होने की जरुरत है। कर्मचारियों का PF समय पर न जमा कराने वाली कंपनियों के खिलाफ सरकार ने एक नया फरमान जारी कर दिया है। EPFO ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि डिफॉल्ट करने वाली कंपनियां अगर नोटिस के बावजूद पीएफ नहीं जमा कराती हैं तो वसूली के लिए उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने की कार्रवाई में तेजी लाई जाएगी।
सालों अटके रहते थे मामले
ईपीएफओ की ओर से जारी एक सर्कुलर के अनुसार हाल में ही डिफॉल्ट के मामलों की समीक्षा की गई है। समीक्षा में सामने आया है कि कर्मचारियों का पीएफ समय से न जमा कराने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े मामलों में ऐसे मामलों की संख्या ज्यादा है जिनमें 1 साल या 2 साल के बाद भी FIR दर्ज कराने की कार्रवाई नहीं की गई है। ईपीएफओ ने माना है कि समीक्षा से यह बात साफ है कि इस मोर्चे पर गंभीर प्रयास किए जाने की जरुरत है जो अब तक नहीं किया गया है।
हर महीने हो मामलों की जांच
EPFO ने कहा है कि ऐसे मामलों में जहां ईपीएफ एक्ट के तमााम प्रावधानों के तहत प्रयास के बावजूद कंपनियां पीएफ का पैसा जमा नहीं कर रही हैं उन मामलों में एफआईआर और मुकदमा दर्ज कराना जरुरी हो जाता है। EPFO ने ऐसे मामलों की हर माह समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं जिससे ऐसे मामलों को तेजी से निपटाया जा सके।
3 माह के अंदर पूरी हो हियरिंग
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा यह भी कहा गया है कि डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों के खिलाफ ईपीएफ एंड एमपी एक्ट के सेक्शन 7ए/14 बी के तहत शुरु की गई प्रोसीडिंग तय समय में पूरी होनी चाहिए। ऐसे मामलों में हियरिंग 3 माह के अंदर पूरी होनी चाहिए। अगर किसी मामले में जांच 6 माह में पूरी नहीं होती है तो असेसिंग ऑफीसर को इसका कारण बताना होगा।
दूसरे कंपनियों में अपने आप होगा सुधार
साथ ही ईपीएफओ ने सर्कुलर में कहा है कि बड़े डिफॉल्टर्स और डिफॉल्ट के पुराने मामलों में एफआईआर दर्ज कराने से पीएफ की रिकवरी करने में मदद मिलेगी और यह दूसरी कंपनियों को भी सबक मिलेगा।


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