रिलायंस कम्युनिकेशन के प्रमुख अनिल अंबानी 45 हजार करोड़ रुपए के कर्ज को खत्म करने के हर प्रयास कर रहे हैं। और अब इसमें उन्हें बड़े भाई मुकेश अंबानी का भी साथ मिल गया है। मुकेश अंबानी Rcom के वायरलेस नेटवर्क को खरीद रहे हैं। इससे उन्हें जियो को और विस्तार देने में मदद भी मिलेगी साथ ही छोटे भाई अनिल अंबानी पर कर्ज का बोझ भी कुछ हद तक कम होगा।
डील हुई पक्की
रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. की सहायक कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम (RJIL) ने गुरुवार को रिलायंस कम्यूनिकेशंस (RCOM) और उसकी सहयोगी कंपनियों की निर्दिष्ट संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए एक निश्चित समझौते पर हस्ताक्षर किया है।
चार श्रेणियों में होगा अधिग्रहण
एक बयान में कहा गया कि इस समझौते के तहत, जियो या उसके द्वारा नामांकित कंपनी आरकॉम और उसकी सहयोगी कंपनियों की चार श्रेणियों की परिसंपत्ति का अधिग्रहण करेगी, जिसमें टॉवर्स, ऑप्टिक फाइबर केबल नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और मीडिया कनवर्जेस नोड्स शामिल हैं। बयान में कहा गया, "ये परिसंपत्तियां रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है, जो RJIL की वायरलेस और फाइबर टू होम व एंटरप्राइस सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान करेंगी।"
जियो ने लगाई सबसे बड़ी बोली
आरकॉम के कर्जदाताओं द्वारा आरकॉम के परिसंपत्तियों की बिक्री की जा रही है, जिन्होंने एसबीआई कैपिटल मार्केट लि. को इस प्रक्रिया के लिए अधिकृत किया है। इस प्रक्रिया का पर्यवेक्षण उद्योग के विशेषज्ञों के एक स्वतंत्र समूह द्वारा किया जा रहा है। RJIL दो चरण में चलने वाली नीलामी प्रक्रिया के दौरान सफल बोलीदाता के रूप में उभरी है।
Rcom के शेयरों के भाव फिर बढ़े
बयान में कहा गया, "यह अधिग्रहण सौदा सरकारी और नियामकीय मंजूरियों, सभी कर्जदारों की सहमति, शेयरधारकों की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।" मजे की बात ये है कि मुकेश अबांनी ने जैसे ही इस बात की घोषणा की है उसके तुरंत बाद आरकॉम के शेयर्स 35 फीसदी उछल गए हैं। आपको बता दें कि रिलायंस कम्युनिकेशन के शेयर 10 रुपए के निम्न स्तर पर पहुंचने के बाद अब तक 235 फीसदी का मुनाफा दे चुके हैं।
काफी सलाह-मशवरों के बाद हुई डील
इस सौदे के लिए रिलायंस जियो को गोल्डमैन सैक्स, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स, जेएम फाइनेंशियल प्राइवेट लिमिटेड, डेविस पॉक, वार्डवेल एलएलपी, सिरील अमरचंद मंगलदास, खेतान एंड को और अर्रेस्ट एंड यंग ने सलाह दी थी।


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