आने वाले समय में दाल महंगी होने की संभावना है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से चना और मसूर पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। आगामी रबी सीजन के दौरान चना और मसूर का अपेक्षाकृत अधिक उत्पादन होने की आशंका है और यदि बेरोकटोक सस्ते आयात की अनुमति दी गई तो इससे किसानों के हितों पर आंच आएगी।
किसानों के हितों की रक्षा होगी
तमाम बातों को ध्यान में रखने के साथ-साथ किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने इस आयात शुल्क में बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। अच्छी बात ये है कि अरहर दाल पर आयात शुल्क नहीं बढ़ाया गया है। देश में अरहर या तुअर दाल की बड़े पैमाने पर खपत होती है।
देश में तुअर दाल की खपत सबसे ज्यादा
मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में तुअर दाल का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है। खासकर कि मध्यप्रदेश की मिट्टी दलहन के उत्पादों के लिए बेहद अच्छी है। हाल ही में तुअर दाल की बढ़ती कीमतों से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था वहीं सरकार की भी काफी आलोचना हुई थी।
अरहर/तुअर दाल पर 10% आयात शुल्क
मौजूदा समय में तूअर या अरहर पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है। सरकार ने हाल ही में पीली मटर पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। हालांकि, अन्य दालों पर फिलहाल कुछ भी आयात शुल्क नहीं लगता है। चालू वर्ष में दालों का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।
दालों की कीमतों में आई है स्थिरता
हालांकि, देश में पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय मूल्य कम रहने के कारण दालों का निरंतर आयात किया जा रहा है। इस तरह के आयात से दालों की घरेलू कीमतें नीचे आ गई हैं और इस वजह से किसानों के हित बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।


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