बहुत समय से अधर में लटके हुई ई-वे बिल को लागू करने का आखिरकार रास्ता साफ ही हो गया है। शनिवार को जीएसटी काउंसिल ने इमरजेंसी मीटिंग में इस बिल को 1 फरवरी से लागू करने पर सहमति जता दी है। यह ट्रांसर्पोटेशन के आधार पर दो तरह से लागू होगा।
इंटर स्टेट ई-वे बिल के लिए काउंसिल ने 1 फरवरी 2018 की डेडलाइन तय की है, जबकि इंट्रा इस्टेट के लिए ई-वे बिल 1 जून 2018 से लागू करने का फैसला किया गया है। आगे आपको ई-वे बिल के बारे में विस्तार से बताएंगे।
टैक्स चोरी में लगेगा लगाम
ई-वे बिल का ट्रायल करने की डेडलाइन तय की गई है जो 16 जनवरी से शुरु होगी। ऐसा मानना है कि ई-वे बिल के लागू हो जाने से सरकार के लिए टैक्स में चोरी पर लगाम कसने में आसानी हो जाएगी। ई-वे बिल रजिस्टर सप्लायर, बायर और ट्रांसपोर्ट जनरेट करेगा। साथ ही यह SMS के जरिए बनाया और कैंसिल कराया जा सकता है।
क्या है ई-वे बिल
ई-वे बिल के तहत 50 हजार रुपए से ज्यादा के अमाउंट के प्रोडक्ट की राज्य या राज्य से बाहर ट्रांसपोर्टेशन या डिलीवरी के लिए सरकार को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए पहले ही बताना होगा। इसके तहत ई-वे बिल जनरेट करना होगा जो 1 से 20 दिन तक वैलिड होगा।
इस तरह से बनेगा ई-वे बिल
यह वैलिडिटी प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगी। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-वे बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी के लिए 20 दिन का ई-वे बिल बनेगा। देखिए ई-वे बिल का समय दूरी के हिसाब से-
0-100 किमी के लिए 24 घंटे
101-300 किमी के लिए 3 दिन
301-500 किमी के लिए 5 दिन
501-1000 किमी के लिए 10 दिन
1000 किमी से ज्यादा के लिए 20 दिन
इंट्रा और इंटर स्टेट ई-वे बिल
राज्य के अंदर ही स्टॉक ट्रांसपोर्ट करने के लिए इंट्रा स्टेट ई-वे बिल बनेगा। तो वहीं एक राज्य से दूसरे राज्य में स्टॉक भेजने या मांगने के लिए इंटर स्टेट ई-वे बिल बनेगा। जिस तारीख से ई-वे बिल लागू होगा उसे अलग से नोटिफाई कर दिया जाएगा। ई-वे बिल की जरुरत नॉन-मोटर कनवेंस, पोर्ट से ट्रांसपोर्ट होने वाली वस्तुएं, एयरपोर्ट, एयर कार्गो कॉम्पलेक्स और लैंड कस्टम स्टेशन के लिए आने-जाने वाली चीजों पर नहीं होगी।
ये उत्पाद नहीं शामिल हैं ई-वे बिल में
ई-वे बिल से कॉन्ट्रासेप्टिव, ज्युडिशियल और नॉन-ज्युडिशियल स्टैंप पेपर, न्यूज पेपर, ज्वेलरी, खादी, रॉ सिल्क, भारतीय झंडा, आदमी के बाल, काजल, दीये, चेक, म्युनसिपल बेस्ट, पूजा सामग्री, एलपीजी, कैरोसिन और करेंसी को बाहर रखा गया है। तो वहीं मल्टीपल कन्साइनमेंट के लिए ट्रांसपोर्टस को कंसोलिडेट ई-वे बिल बनवाना होगा। साथ ही अगर वस्तुओं को एक वाहन से दूसरे में ट्रांसफर करना है तो ई-वे बिल की जरुरत पड़ेगी।
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