देश में डिजिटल लेन-देने को बढ़ावा देने के लिए केंद्र की मोदी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार मर्चेंट डिस्काउंट रेट से लोगों को राहत दे सकती है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेसवार्ता में इस बात के संकेत भी दिए हैं।
नहीं देना होगा MDR शुल्क
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अब डिजिटल ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं देना होगा। हालांकि सरकार की इस सुविधा का लाभ लेने के लिए 2000 रुपये तक डिजिटल लेनदेन करना होगा। फिलहाल मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) में छूट का फैसला दो साल तक के लिए लिया गया है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रियों की हुई बैठक में इस फैसले पर अंतिम मुहर लगाई गई।
डिजिटल भुगतान को मिला बढ़ावा
प्रेस वार्ता में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार बैंकों और व्यापारियों को MDR का भुगतान करेगी।आपको बता दें कि, डेबिट कार्ड, आधार के जरिए पेमेंट, यूपीआई (भीम ऐप) से पेमेंट करने पर प्रत्येक ट्रांजेक्शन सेवा के लिए दुकानदार बैंक को एक रकम देता है. यही रकम मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) कहलाता है।
दुकानदारों को देनी होती है फीस
आप जिस स्वाइप मशीन के जरिए पेमेंट करते हैं उसे दुकानदारों को बैंकों से लेना होता है। बैंक की ओर से MDR के तौर पर कमाई गई राशि में से कार्ड जारी करने वाले बैंक और कुछ हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स जैसे वीजा, मास्टरकार्ड या NPCI को दिया जाता है। इसी चार्ज के चलते कई दुकानदार कार्ड से पेमेंट लेने से बचते हैं।
वित्तमंत्री करेंगे RBI के साथ बात
वहीं वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि, एमडीआर के मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक के साथ चर्चा करेंगे ताकि इसे कम करने की प्रणाली पर काम किया जा सके। केंद्रीय बैंक ने हाल ही में इस दर को सौदा मूल्य के 0.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.90 प्रतिशत कर दिया।


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