ट्राई ने नेट न्यूट्रैलिटी पर अपनी सिफारिशें दे दी हैं जिसमें कहा गया है कि टेलीकॉम कंपनियों को बिना भेद-भाव के एक्सेस देना होगा। कंपनियां किसी की भी स्पीड घटा या बढ़ नहीं सकेंगी। इस सिफारिश में यह भी कहा गया है कि टेलीकॉम कंपनियां करार करके नेट सेवाएं दें।
लाइसेंस एग्रीमेंट में संशोधन के लिए भी सिफारिश
ट्राई ने नेट न्यूट्रैलिटी पर सुझाव देते हुए लाइसेंस एग्रीमेंट में संशोधन की भी सिफारिश की है। ट्राई का कहना है कि सर्विस प्रोवाइडर सेवा उपलब्ध करवाने में भेदभाव नहीं कर सकता। उसको सबको एक तरह का कंटेट मुहैया करवाना चाहिए। ट्राई के अनुसार इंटरनेट ऑफ थिंग्स नेट न्यूट्रैलिटी में शामिल हैं। कंपनियां स्पीड घटा या बढ़ा नहीं सकतीं।
क्या है नेट न्यूट्रैलिटी
नेट यूट्रीलिटी एक प्रिंसिपल है जिसके तहत माना जाता है कि इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियां सभी डाटा के साथ एक जैसा व्यवहार करेंगी। इन कंपनियों को अलग-अलग डाटा के लिए अलग-अलग कीमत नहीं लेनी चाहिए। कंपनियों को न तो किसी सेवा को ब्लॉक करना चाहिए न ही उसकी स्पीड स्लो करना चाहिए। यह बिल्कुल उसी तरह से है जैसे सड़क पर हर तरह के ट्रैफिक के साथ एक समान व्यवहार होना चाहिए।
नेट न्यूट्रैलिटी पर कंसलटेशन पेपर
ट्राई ने इस साल जनवरी में नेट न्यूट्रैलिटी पर कंसलटेशन पेपर जारी किया था। पेपर में काफी हद तक ट्राई का फोकस नेटवर्क स्पीड पर था जिससे टेलीकॉम ऑपरेटर्स इसे किसी प्रिफरेंस के लिए यूज न कर सकें। इन सेवाओं को एक्सेस करने के लिए बेहतर नेट स्पीड की जरुरत होती है।
नेट न्यूट्रैलिटी पर पॉलिसी भी बनेगी
कोई इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के नियमों का उल्लंघन न कर सके इसके लिए ट्राई ने एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाने की सिफारिश की है। यह कमेटी नियमों के उल्लंघन की जांच भी करेगी। केंद्र सरकार ट्राई की सिफारिशों के आधार पर नेट यूट्रीलिटी पर पॉलिसी भी बनाएगी।


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