केंद्र सरकार मार्च 2018 से पहले ब्याज दर में कटौती की कवायद कर रही है। देश की अर्थव्यवस्था में तेजी का अब यही एक रास्ता केंद्र सरकार को नजर आ रहा है। समाचार पोर्टल आजतक ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक लिख है कि, सरकार RBI पर इसके लिए दबाव बना रही है ताकि अगली मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती का रास्ता साफ हो जाए।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार का आकलन है कि महंगाई दर निर्धारित 4 फीसदी के आंकड़े के आसपास रहेगी लिहाजा केन्द्रीय बैंक को प्रभावी ब्याज दरों में कटौती करनी चाहिए।
अक्टूबर में मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को 6 फीसदी पर कायम रखा था। रेपो रेट का यह स्तर सात साल का न्यूनतम है, इसे देखते हुए अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि अगले वर्ष की दूसरी तिमाही तक केन्द्रीय बैंक ब्याज दरों में बदलाव को नकारता रहेगा।
वहीं सूत्रों का दावा है कि केन्द्र सरकार ब्याज दरों में कटौती के लिए इतना लंबा इंतजार नहीं चाहती। लिहाजा उसकी नजर दिसंबर 2017 और फरवरी 2018 में होने वाली मौद्रिक समीक्षा पर है जहां उसे उम्मीद है कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती का ऐलान करेगा।


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