पिछले कुछ महीनों से लगातार एलपीजी सिलेंडरों के दाम बढ़ते जा रहे हैं। जिसका असर सीधे आम आदमी के जीवन पर पड़ रहा है, क्योंकि इससे किचन का बजट बढ़ रहा है। पिछले एक से डेढ़ साल में सरकार ने 19 वीं बार रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि की है। अब आपको गैर सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए 93 रुपए अधिक चुकाने होंगे।
4.50 रुपए प्रति सिलेंडर के हिसाब से इजाफा
आपको बता दें की सरकार ने सब्सिडी वाली रसोई गैस की कीमतों में 4.50 रुपए प्रति सिलेंडर के हिसाब से इजाफा कर दिया है। तो वहीं गैर सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत भी बढ़ा दी है। यानी की अब आपको इसके लिए 93 रुपए अधिक पैसे देने पड़ेंगे। इसके अलावा जेट फ्यूल की कीमत में भी 2 फीसदी का इजाफा हुआ है।
19वीं बार बड़ी है कीमत
सरकार ने पिछले साल जुलाई में हर महीने गैस की कीमत बढ़ाकर गैस सब्सिडी खत्म करने का निर्णय लिया था। तब से लेकर अब तक 19 वीं बार कीमत में हुए इजाफे के अनुसार घरेलू रसोई गैस का सब्सिडीयुक्त 14.2 किलोग्राम का एक सिलेंडर अब 495 रुपए में मिलेगा। तो वहीं बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 93 रुपए बढ़कर 742 रुपए प्रति सिलेंडर हो गई है। इससे पहले आखिरी बार एक अक्टूबर को इसकी कीमत 50 रुपए बढ़ाकर 649 रुपए की गई थी।
अगले साल मार्च तक सब्सिडी खत्म करने का उद्देश्य
आपको याद हो तो पिछले साल सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों से हर महीने कीमत वृद्धि करने के लिए कहा था ताकि अगले साल मार्च तक सब्सिडी को खत्म किया जा सके। इस नीति को लागू किए जाने के बाद से अब तक सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में 76.51 रुपए की वृद्धि हुई है। जून 2016 में इसकी कीमत 419.18 रुपए प्रति सिलेंडर थी।
जेट फ्यूल में भी वृद्धि
सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की अधिसूचना के अनुसार विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में भी 2 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अगस्त से अब तक इसकी कीमत में भी यह लगातार चौथी बार ग्रोथ है। पेट्रोलियम कंपनियों के अनुसार विमान ईंधन की दिल्ली में कीमत 54,143 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है। यह पिछली कीमत 53,045 रुपए प्रति किलोलीटर से 1,098 रुपए अधिक है। इससे पहले एक अक्टूबर को इसकी कीमत में 6 प्रतिशत यानी 3,025 रुपए प्रति किलोलीटर की वृद्धि हुई थी।
हर महीने दाम में होता है परिवर्तन
सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी और एटीएफ की कीमतों को संशोधित करती हैं। यह पिछले माह तेल की औसत कीमत और विदेशी मुद्रा विनिमय दर पर निर्भर करती है।


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