अगले 4 साल में रेलवे पूरी तरह से विद्ययुतीय हो जाएगा। यानी कि सभी 2021 तक सभी ट्रेनें बिजली से चलेंगी। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिर्पोट के अनुसार रेलवे के द्वारा 35,000 करोड़ रुपए खर्च करके रेलवे को पूरी तरह से विद्युतीकरण किया जा रहा है। इलेक्ट्रिफिकेशन के बाद रेलवे हर साल डीजल ईंधन से 10,500 करोड़ रुपए बचा पाएगा। इसके लिए रेलवे अपने संसाधनों से फंड जुटाएगा। आपको बता दें कि अभी तक देश में आधे से ज्यादा रेलवे ट्रैक्स का इलेक्ट्रिफिकेशन किया जा चुका है, जिसमें 66,000 हजार किलोमीटर के रेल नेटवर्क का विद्ययुतीयकरण किया जाना है।
सरकारी और प्राइवेट एजेंसियां करेंगी मदद
रेलवे के इस काम के लिए ईरकॉन, राइट्स, पीजी, पीजीसीआईएल जैसी सरकारी एजेंसियों के अलावा कई प्राइवेट एजेंसीज की भी मदद ली जाएगी। ईकोनॉम्क्सि टाइम्स ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हमने फुल इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए 2021 तक का लक्ष्य रखा है। इससे हमारे ईंधन का सालाना बिल 26,500 करोड़ रुपए से घटकर 16,000 करोड़ पर आ जाएगा।
डायरेक्ट बिजली कंपनियों से लेंगे बिजली
बिल को कम करने के लिए रेलवे की योजना डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की जगह बिजली का उत्पादन करने वाली कंपनियों से डायरेक्ट बिजली लेने की है। इससे रेलवे का सालाना 25,00 करोड़ रुपए की बचत का अनुमान है। रेलवे हर साल औसतन 95,00 करोड़ रुपए का बिजली बिल और 17,000 करोड़ रुपए का डीजल बिल चुकाता है।
5 सालों में 5,000 इलेक्ट्रिक इंजनों की जरुरत
अगले 5 सालों में रेलवे को 5,000 इलेक्ट्रिक इंजनों की जरुरत होगी। अभी उसके पास 44,00 इलेक्ट्रिक इंजन है। वाराणसी और पश्चिम बंगाल के चित्तरंजन के कारखाने में बिजली के इंजन का निर्माण होगा। अगले साल मधेपुरा के इंजन कारखाने में भी प्रॉडक्शन का काम शुरु हो जाएगा।
ग्लोबल कांफ्रेंस में शामिल होंगे रेलवे मंत्री
विद्युतीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए रेलवे शुक्रवार को एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है। इस कॉन्फ्रेंस में कई ग्लोबल कंपनियां भी हिस्सा लेंगी। इस कॉन्फ्रेंस में रेल मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल होंगे।


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