देश में खत्म होते जनाधार को वापस पाने के लिए विपक्ष एक बार फिर नोटबंदी के नाम का सहारा ले रही है। हालांकि देश अब नोटबंदी के प्रभाव से बाहर आ चुका है और सबकुछ सामान्य है फिर भी विपक्ष लगातार नोटबंदी के जरिए राजनीति करने से नहीं चूकता है। विपक्ष 8 नवंबर को काला दिवस मनाने की तैयारी में है। अब प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस दो अन्य सहयोगी तृणमूल कांग्रेस और आरजेडी के साथ मिलकर 8 नवंबर को काला दिवस मनाएगी। कांग्रेस को शरद यादव का भी साथ मिला है पर कांग्रेस के साथ जेडीयू नहीं है।

विपक्षी दलों ने कहा कि वे एक साल पहले सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले के विरोध में 8 नवंबर को काले दिन के रूप में मनाएंगे। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं को बताया कि सभी विपक्षी दल एक संयुक्त रणनीति के तहत 8 नवंबर 2016 को लिए गए विमुद्रीकरण (नोटबंदी) के फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज करेंगे।
आजाद ने याद दिलाया कि सरकार ने पिछले साल नोटबंदी करने के बाद किस तरह बार-बार नियमों में बदलाव किए। उन्होंने कहा, "विमुद्रीकरण सरकार का एक गलत ढंग से और जल्दबाजी में लिया गया फैसला था। यह शायद पूरी दुनिया में अभूतपूर्व है कि किसी सरकार को एक माह में 135 बार अपनी नीति में बदलाव करना पड़ा।"
विपक्षी दलों द्वारा 8 नवंबर को काले दिन के रूप में मनाने का फैसला सोमवार को एक समन्वय बैठक में लिया गया, जिसमें जदयू के बागी नेता शरद यादव, माकपा सांसद डी. राजा, डीएमके सांसद कनिमोझी, बसपा के सतीश मिश्रा और तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन मौजूद थे।


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