इस बार शादी करना थोड़ा मंहगा पड़ सकता है। इसकी वजह है नोटबंदी और जीएसटी का लागू होना। इंडस्ट्री चैम्बर एसोचेम ने कहा कि शादी के लिए हॉल, गार्डन, टेंट बुकिंग, फोटोग्राफी जैसी वेडिंग सर्विसेज पर नोटबंदी और जीएसटी का 10 से 15 प्रतिशत असर होगा। एसोचेम के अनुसार अभी इंडियन वेडिंग इंडस्ट्री करीब 1 लाख करोड़ रुपए की और यह सलाना 25-30 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। एक शादी की अनुमानित लागत 3 लाख से 8 करोड़ रुपए के बीच हो सकती है।
इन चीजों का बढ़ेगा खर्च
एसोचेम का कहना है कि जीएसटी के चलते शॉपिंग, फूड सर्विसेज, टेंट बुकिंग जैसी सर्विसेज का औसत खर्च बढ़ने का अनुमान है। इनमें अधिकांश सर्विसेज पर जीएसटी रेट 18 से 28 प्रतिशत है। जीएसटी से पहले ऐसी कई सर्विसेज पर कोई टैक्स नहीं देना होता था क्योकि कई काम अनरजिस्टर्ड बिल्स पर होते थे।
डेस्टिनेशन वेडिंग पर नहीं पड़ेगा असर
एसोचेम का कहना हे कि वेडिंग सेक्टर में 10 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले डेस्टिनेशन वेडिंग या देश के वेडिंग टूरिज्म पर नोटबंदी और जीएसटी का कोई खास असर नहीं पड़ेगा। एसोचेम ने बताया कि भारत में गोवा के Beach और राजस्थान के किले में डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए लोगों पहली पसंद है। विदेश में शादी करने की इच्छा रखने वालों की पहली पसंद बाली और दुबई है। भारत की वेडिंग इंडस्ट्री सालाना 25 से 30 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कर रही है।
ये चीजें हुईं मंहगी
जीएसटी लागू होने के बाद वेडिंग के दौरान खरीदे जाने वाले कई प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ गए है। जैसे- 500 रुपए से ज्यादा की कीमत के फुटवियर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है। सोना और हीरे की ज्वेलरी पर टैक्स 1.6 प्रतिशत से बढ़कर 3 प्रतिशत हो चुका है। फाइव स्टार होटल्स की बुकिंग पर भी 28 फीसदी जीएसटी देना होगा। इवेंट मैनेजमेंट सर्विस पर भी 18 फीसदी जीएसटी लगेगा। मैरिज हॉल बुकिंग या गार्डन बुकिंग जैसी सर्विसेज पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।
उधार खरीदी हो सकती है मुश्किल
शादी के समय अधिकांश लोग पर्याप्त कैश नहीं होने के कारण ग्रॉसरीज समेत कई चीजों की खरीददारी उधार पर खरीदते हैं, जिसका पेमेंट वो बाद में करते हैं। लेकिन, नया टैक्स सिस्टम जीएसटी के लागू होने के कारण ट्रेडर्स उधार पर सामान देने से हिचक सकते हैं।


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