प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया की मुहिम को तगड़ा झटका लगा है। इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली दिग्गज कंपनी टेस्ला ने भारत के बजाय चीन में अपना पहला विनिर्माण संयंत्र लगाने का फैसला किया है। चीन में टेस्ला एक पूर्ण स्वामित्व वाली फैक्ट्री लगाने के समझौते के करीब पहुंच गया है। चीन ने बड़ी ही चतुराई से इस दौड़ में जीत हासिल कर ली है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेस्ला को अमेरिका से बाहर इलेक्ट्रिक विनिर्माण संयत्र स्थापित करने के लिए भारत आने का न्यौता दिया था।

टेस्ला ने चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई में अपना संयत्र लगाने का मन बनाया है। कंपनी को शुरु करने में चीन पूरी मदद करेगा। इस पूरे मामले पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट भी प्रकाशित की है। टेस्ला को उम्मीद है कि 2017 के अंत तक चीन के साथ इस मुद्दे पर समझौता पूरा हो जाएगा।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान टेस्ला का के संयत्र का दौरा भी किया था। वहीं टेल्सा प्रमुख एलन मस्क ने माना है कि भारत संभावनाओं का देश है। एलन मस्क ने भारत के 2030 तक सभी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक करने के मिशन की तारीफ की है।
सभी प्रयासों के बावजूद चीन इस रेस में आगे निकल गया है। जिसके पीछे सबसे बड़ा कारण है किसी ठोस रणनीति का ना होना। चीन पूरी रणनीति के साथ और कानून बनाकर इस दिशा में आगे बढ़ रहा है जबकि भारत में अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है। अगर भारत इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण के लिए कड़े कानून और नीति बनाता तो हो सकता है कि आज टेस्ला चीन की बजाय भारत में अपना विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने पर विचार करता।


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