सैर कर दुनिया की गाफिल जिंदगानी फिर कहां,
जिंदगानी गर रही तो नौजवानी फिर कहां ''
यह पंक्तियां घुमक्कड़ी, यायावरी, पर्यटन और यात्राओं के पूरे दर्शन को समाहित किए हुए है। पर्यटन आज दुनिया ही नहीं अब भारत में भी एक बड़ा उद्योग का दर्जा पा चुका है, लेकिन बीते हजारों वर्षों में दुनिया को जोड़ने, खोजने, समझने और साहित्य, कला संस्कृति के साथ विज्ञान को भी एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचाने का काम भी यात्रियों व पर्यटकों ने ही किया है।

कम से कम भारत जैसे विविधताओं और विभिन्नता वाले देश में पर्यटन ही एक ऐसा मजबूत माध्यम रहा है, जिससे विभिन्न संस्कृतियां एक दूसरे के नजदीक तेजी आयीं। विदेशों से भारत में आने वाले सैलानियों के साथ ही अब घरेलू पर्यटकों की संख्या में भी भारी वृद्धि गत वर्षों में हुई है। इसको देखते हुए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के सहयोग से 5 अक्टूबर से लेकर 25 अक्टूबर तक शानदार पर्यटन पर्व मना रही है। इसके तहत 'देखो अपना देश', 'सभी के लिए पर्यटन' और 'पर्यटन एवं शासन व्यवस्था' जैसे लक्ष्यों को लेकर एक बड़ा अभियान शुरु किया गया है, जिसमें देश के पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण के बीच मौजूद सभी राज्यों में भव्य व विस्तृत कार्यक्रम किए जा रहे हैं।
देश में आम लोगों के लिए घुमक्कड़ी कोई शौक नहीं था, लेकिन आज घरेलू पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। देश में राहुल सांस्कृत्यायन भारत के बड़े यायावर अथवा यात्री थे, जिन्होंने पूरा जीवन दर्जनों देशों की यात्रा करने में बिताया. उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ में जन्मे राहुल ने अपने जीवन के 45 वर्ष भारत, तिब्बत, रूस, श्रीलंका, यूरोप और कई एशियाई देशों की दुर्गम यात्राओं में गुजारे थे। साथ ही उन्होंने यात्राओं के संस्मरण भी लिखे, जो हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर बन चुके हैं। 'अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा' उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो घूमने के शौकीनों के लिए किसी धर्म ग्रंथ से कम नहीं है।
यहां एक बात स्पष्ट समझ लेनी चाहिए कि पर्यटक और यात्री में फर्क होता है। पर्यटक उन्हीं चीजों को देखने जाता है, जिसके बारे में वह पहले से जानता है, लेकिन यात्री नये स्थलों को खोजता है और नई जानकारियां जुटाता है। अगर मार्को पोलो व वास्कोडिगामा जैसे यात्री ना होते तो दुनिया के तमाम देशों को दूसरे अज्ञात देशों की जानकारी ना हो पाती। इसी तरह चीनी यात्रियों फाह्यान व ह्वेनसांग आदि की वजह से बौद्ध धर्म व प्राचीन भारतीय संस्कृति का संपर्क चीन के साथ हो सका। देश में उत्तर भारत को दक्षिण से जोड़ने और पश्चिम को पूर्वी भारत से जोड़ने का काम आजादी के बाद पर्यटन उद्योग ने ही किया। इन्हीं सब उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से देश में घूमने और उसकी विविधता को समझने का आह्वान किया था।
इसको ध्यान में रखते हुए ही पर्यटन मंत्रालय ने 20 दिवसीय पर्यटन पर्व देशभर में मनाने का अभियान शुरू किया है। केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ महेश शर्मा और केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के.जे. अल्फोंस ने देश की राजधानी दिल्ली स्थित हुमायूं के मकबरे से पर्यटन पर्व का उद्घाटन किया, तो वही सभी राज्यों में 5 अक्टूबर से ही उन राज्यों के प्रमुख पर्यटक व ऐतिहासिक स्थलों पर विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए अभियान की शुरुआत हुई। राज्यों के साथ ही केंद्र सरकार के 18 मंत्रालय भी इस पर्व में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत पर इस अभियान के जरिए विशेष जोर दिया जा रहा है। पर्यटन पर्व का समापन इंडिया गेट पर 25 अक्टूबर को होगा, जिसमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी उपस्थित रहेंगे।
इस पर्व की खूबी यह भी है कि यह सिर्फ लोगों को घूमने-फिरने के बारे में जानकारी देने अथवा उन्हें प्रोत्साहित करने मात्र के लिए नहीं है। बल्कि इसके जरिए देश में तेजी से विकसित हो रहे पर्यटन उद्योग में रोजगार के असीम अवसरों को पहचानना और युवाओं को इस रोजगार के प्रति आकर्षित कराना भी है. इसीलिए अल्फोंस ने अपने संबोधन में इसका उल्लेख करते हुए कहा कि बढ़ते पर्यटन से लोगों को रोजगार देने और क्षेत्रीय विकास के नए अवसर पैदा होंगे।
पर्व के दौरान रेलवे, सड़क परिवहन व शहरी विकास जैसे कई मंत्रालय पर्यटन स्थलों व उसके आस-पास के इलाकों में साफ सफाई को लेकर विशेष अभियान चला रहे हैं। वहीं पर्यटन मंत्रालय ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटक स्थलों की साफ-सफाई का अभियान चलाने के साथ ही स्थानीय स्तर पर ऐसे कार्यक्रम भी चला रहा है, जिससे लोगों को ऐतिहासिक स्थलों का महत्व पता चले और वह उनकी देखभाल व साफ- सफाई करने के लिए प्रेरित हों।
दुनिया में पर्यटन उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। यही कारण है कि वर्ष 2016 में लगभग 123 करोड़ पर्यटकों ने विश्व भ्रमण किया। विश्व जीडीपी में पर्यटन उद्योग का योगदान 10.2% है. वहीं भारत के सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन उद्योग का 9.6 प्रतिशत का योगदान है। देश में उपलब्ध रोजगार में से 9.3 प्रतिशत रोजगार इस क्षेत्र से मिल रहा है। विदेशी पर्यटकों को सुविधा प्रदान करने के लिए सैलानियों को 16 हवाई अड्डों पर ई-पर्यटक वीजा उपलब्ध कराने का काम पहले ही शुरू कर दिया गया था। इससे विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। इस वर्ष जनवरी से मार्च के सिर्फ 3 माह में 4.67 लाख विदेशी यात्री इ-वीजा के माध्यम से देश में आए।
पर्यटन पर्व के तीन प्रमुख बिंदु हैं, जिसमें देखो अपना देश, सभी के लिए पर्यटन और पर्यटन एवं शासन व्यवस्था पर कार्यक्रम किए जा रहे हैं। इस अवसर पर विभिन्न पर्यटन स्थलों के वीडियो, फोटोग्राफी और ब्लॉग लेखन की प्रतियोगिताएं की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर पर्यटकों की दृष्टि से भारत की गाथाओं का वर्णन किया जा रहा है।
पर्यटन संबंधी प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम, वाद-विवाद और चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन राज्यों में हो रहा है। जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में पर्यटकों को लुभाने के लिए टेलीविजन द्वारा अभियान शुरू किया गया है। इसके अलावा सभी राज्यों में पर्व के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य, संगीत, नाटक और कथा वाचन का भी आयोजन हो रहा है। कार्यक्रम स्थलों पर पर्यटन प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें संस्कृति, खान-पान और हस्तशिल्प कला का प्रदर्शन हो रहा है। साथ ही पर्यटन उद्योग से जुड़े विभिन्न हितधारकों व पक्षकारों के लिए भी कार्यशाला लगाई गई है।
अहमदाबाद में 5 से 25 अक्टूबर तक फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है, जिसमें प्रकृति और वन्यजीव फोटोग्राफी की थीम रखी गई है। 'खुशबू गुजरात की' का विशेष आयोजन करने के अलावा जनजातीय उत्सव भी मनाया गया. महाराष्ट्र में 25 अक्टूबर तक राज्य के विभिन्न स्कूलों में वीडियो प्रदर्शनी व महाराष्ट्र को खोजें विषय पर कई कार्यक्रम रखे गए हैं। इसी तरह पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, पंजाब, बिहार और मध्य प्रदेश में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ विविध आयोजन किए जा रहे हैं।
रेलवे ने यात्रियों के लिए यात्रा सुखद करने के दृष्टिकोण से स्टेशनों की विशेषता सज्जा की है इसी तरह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पर्यटन सर्किटों में सड़कों के किनारे जन सुविधाओं की शुरुआत करके कार्यक्रम में सहयोग किया है। इसके अलावा नागर विमानन मंत्रालय, वित्त, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, गृह, वाणिज्य और विदेश मंत्रालय ने भी अपने अपने ढंग से पर्व में सहयोग किया है।
इस पूरे पर्व के दौरान राज्य सरकारें और केंद्र सरकार के मंत्रालय सभी आयोजनों में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी करा रहे है। विशेष तौर पर युवाओं को इसमें जोड़ा गया है। पर्यटन उद्योग में रोजगार के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर असीम संभावनाएं हैं और इसके लिए युवाओं को पर्व के दौरान जानकारी दी जाएगी। यही नहीं कई राज्यों में टैक्सी, ऑटो, रिक्शा चालकों, होटल व्यवसायियों व अन्य लोगों को पर्यटकों के साथ अच्छे व्यवहार करने व उनकी मदद करने के तरीकों की भी जानकारी दी जा रही है। पर्व का यह पूरा अभियान भारत के पर्यटन उद्योग का परिदृश्य बदल देगा। इससे जहां घरेलू पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा, वही विदेशी सैलानियों को और अनुकूल वातावरण देश में उपलब्ध हो सकेगा।
More From GoodReturns

ईरान-इजरायल जंग के बढ़ते तनाव पर केंद्र ने दिया भरोसा, भारत में तेल की नहीं होगी कमी, मजबूत है क्रूड स्टॉक

Silver Price Today: 4 मार्च को चांदी में भारी उतार-चढ़ाव! 30,000 रुपये टूटा भाव, जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Gold Price Today: 8 मार्च को सोना खरीदने का प्लान है? जानें आज रविवार को गोल्ड रेट सस्ता हुआ या महंगा

Silver Price Today: 8 मार्च को चांदी खरीदने का प्लान है? जानें आज 1 किलो चांदी का भाव क्या है?

Gold Rate Today: 6 मार्च को सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24K, 22K और 18K गोल्ड रेट

Silver Price Today: शनिवार को बाजार में हड़कंप! फिर चांदी के दाम धड़ाम, जानें 1 किलो चांदी का रेट क्या है?

PNB का बड़ा फैसला! 13 डेबिट कार्ड से ATM कैश निकासी सीमा आधी, जानें किन कार्डधारकों पर पड़ेगा असर

Ladli Behna Yojana 34th Installment: 1500 या 3000 रुपये? जानें कब आएगी 34वीं किस्त और ऐसे करें स्टेटस चेक

Gold Rate Today: सराफा बाजार में सोने के दामों में लगातार कमी, जानें आज कितना सस्ता हुआ 22K और 24K गोल्ड

Silver Price Today: 6 मार्च को भी चांदी में उतार-चढ़ाव! 30,100 रुपये टूटा भाव, जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

CM Kisan Samman Yojana: राजस्थान किसानों के लिए अपडेट! कब आएगी 6वीं किस्त, ऐसे चेक करें पेमेंट स्टेटस



Click it and Unblock the Notifications